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पयाम लाई है बाद ए सबा मदीने से Lyrics In हिन्दी

(पयाम लाई है बाद-ए-सबा मदीने से, कि रहमतों की उठी है घटा मदीने से)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : पयाम लाई है बाद-ए-सबा मदीने से

श्रेणी (कटेगरी) : हम्द के बोल (लीरिक्स) कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स) सलात ओ सलाम के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : सीमाब अकबराबादी

नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात

जोड़ा गया : 03 Feb, 2026 09:32 AM IST

बार देखा गया : 158

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

पयाम लाई है बाद-ए-सबा मदीने से,
कि रहमतों की उठी है घटा मदीने से

हमारे सामने ये नाज़िश-ए-बहार फ़ुज़ूल,
बहिश्त ले गई है फ़ज़ा मदीने से

फ़रिश्ते सैकड़ों आते हैं और जाते हैं,
बहुत क़रीब है अर्श-ए-ख़ुदा मदीने से

न आएँ जा के वहाँ से यही तमन्ना है,
मदीने ला के न लाए ख़ुदा मदीने से

इलाही कोई तो मिल जाए चारागर ऐसा,
हमारे दर्द की ला दे दवा मदीने से

हिसाब कैसा, नक़ीरैन हो गए बे-ख़ुद,
जब आई क़ब्र में ठंडी हवा मदीने से

ख़ुदा के घर का गदा हूँ, फ़क़ीर-ए-कू-ए-नबी,
मुझे तो इश्क़ है मक्के से या मदीने से

चले ही आओ मज़ार-ए-हुसैन पर सीमाब,
कुछ ऐसी दूर नहीं कर्बला मदीने से

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम मदीना मुनव्वरा की पवित्रता और वहाँ से मिलने वाले आध्यात्मिक सुकून का एक भावपूर्ण वर्णन है। इसमें मदीने की मिट्टी और हवा को जन्नत से भी श्रेष्ठ बताया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों में कवि कहता है कि सुबह की ठंडी हवा (सबा) मदीने से ईश्वर की दया का संदेश लाई है। मदीने की फ़ज़ा इतनी रूहानी है कि वह अपने साथ स्वर्ग की सुंदरता समेटे हुए है; यहाँ तक कि क़ब्र में भी जब वहाँ की हवा पहुँचती है, तो हिसाब लेने वाले फ़रिश्ते भी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
बाद-ए-सबासुबह की ठंडी और सुखद हवा
नाज़िश-ए-बहारबसंत का गर्व या सुंदरता
बहिश्तस्वर्ग या जन्नत
अर्श-ए-ख़ुदाईश्वर का सिंहासन (परम धाम)
चारागरउपचार करने वाला या डॉक्टर
नक़ीरैनक़ब्र में सवाल पूछने वाले दो फ़रिश्ते
गदा / फ़क़ीरभिखारी या द्वार पर बैठा याचक

सारांश (Summary)

इस नात का सारांश यह है कि मदीना वह स्थान है जहाँ हर असाध्य रोग की दवा मिलती है और जहाँ से ईश्वर का सिंहासन (अर्श) बहुत निकट है। कवि 'सीमाब' की केवल एक ही इच्छा है कि यदि ईश्वर उन्हें एक बार मदीने बुला ले, तो फिर वहाँ से कभी वापस न लाए। यह कलाम मक्का, मदीना और कर्बला के अटूट रूहानी संबंध को भी रेखांकित करता है।

नात के आखिर में मज़ार-ए-हुसैन और कर्बला का ज़िक्र किस तरह किया गया है, और क़ब्र में "नकीरैन" के बे-खुद होने की वजह क्या बताई गई है?

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