प्यासी है सकीना
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टाइटल : लौट के आजा मेरी माँ तुझ में बसी है मेरी जान मेरी प्यारी प्यारी माँ
श्रेणी (कटेगरी) : नज़्म के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सरफराज़ नूरी गोरखपुरी
नातख्वान/कलाकार: सरफराज़ नूरी गोरखपुरी
जोड़ा गया : 21 May, 2026 06:15 PM IST
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लौट के आजा मेरी माँ,
तुझ में बसी है मेरी जान,
जी न सकूँगा तेरे बिना,
मेरी प्यारी प्यारी माँ।
मेरी प्यारी प्यारी माँ,
मेरी अच्छी अच्छी माँ।
जब मैं रूठा करता था,
तू ही मनाने आती थी,
मेरी खुशियों के खातिर,
अपना सब लुटवाती थी,
कौन पढ़ेगा चेहरा मेरा,
किससे करूँगा अब मैं बयाँ,
कोई न समझे दिल की ज़ुबाँ,
मेरी प्यारी प्यारी माँ।
मेरी प्यारी प्यारी माँ,
मेरी अच्छी अच्छी माँ।
मैं बीमार जो पड़ता था,
नींद तेरी उड़ जाती थी,
सारी तवज्जोह दुनिया से,
मेरी तरफ मुड़ जाती थी,
कौन करेगा फ़िक्र मेरी,
कौन पिलाएगा दवा मुझे,
बाहों में ले ले आके मुझे,
मेरी प्यारी प्यारी माँ।
मेरी प्यारी प्यारी माँ,
मेरी अच्छी अच्छी माँ।
सूना सूना लगता है,
घर मेरा सब कुछ होकर भी,
काश मैं तुझे ला पाऊँ,
अपना सब कुछ खोकर भी,
तेरा वजूद रहमत है,
कदम के नीचे जन्नत है,
ढूँढूँ तुझे मैं कहाँ कहाँ,
मेरी प्यारी प्यारी माँ।
लौट के आजा मेरी माँ,
तुझ में बसी है मेरी जान,
जी न सकूँगा तेरे बिना,
मेरी प्यारी प्यारी माँ।
मेरी प्यारी प्यारी माँ,
मेरी अच्छी अच्छी माँ।
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यह एक बच्चे का अपनी माँ के बिछड़ जाने पर गहरे दुःख और उनकी ममता का वर्णन है, जिसमें बताया गया है कि माँ के बिना पूरी दुनिया सूनी हो जाती है और उनका होना ही संतान के लिए सबसे बड़ी नियामत है।
इस गीत का अर्थ है कि माँ के चले जाने से जीवन में एक ऐसा खालीपन आ गया है जिसे कोई और नहीं भर सकता। शायर कहता है कि बचपन की बीमारी हो या कोई भी उदासी, सिर्फ माँ ही थी जो अपनी नींद और खुशियाँ कुर्बान करके हर दर्द बाँट लेती थी, पर अब उनके बिना दिल का हाल समझने वाला कोई नहीं बचा।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| बयाँ | प्रकट करना / व्यक्त करना (Express) |
| ज़ुबाँ | भाषा / दिल की बात (Language/Voice) |
| तवज्जोह | ध्यान / एकाग्रता (Attention) |
| फ़िक्र | चिंता / परवाह (Care/Concern) |
| वजूद | अस्तित्व / होना (Existence) |
| रहमत | कृपा / ईश्वर का आशीर्वाद (Blessing) |
माँ का साया दुनिया का सबसे सुरक्षित आँचल है और उनके चरणों में ही जन्नत बसी होती है। शायर अपनी माँ को याद करते हुए कहता है कि सब सुख-सुविधाएँ होने के बाद भी उनके बिना पूरा घर सूना लगता है, और वह अपना सब कुछ खोकर भी अपनी प्यारी माँ को वापस पाना चाहता है।
माँ के चले जाने के बाद शायर को अपना घर कैसा लगता है, और माँ के क़दमों के नीचे क्या बताया गया है?