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क़ुर्बान मैं उनकी बख़्शिश के मक़सद भी ज़बाँ पर आया नहीं Lyrics In हिन्दी

(क़ुर्बान मैं उनकी बख़्शिश के मक़सद भी ज़बाँ पर आया नहीं, बिन माँगे दिया और इतना दिया दामन में हमारे समाया नहीं)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : क़ुर्बान मैं उनकी बख़्शिश के मक़सद भी ज़बाँ पर आया नहीं

श्रेणी (कटेगरी) : हम्द के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : खालिद महमूद खालिद

नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात

जोड़ा गया : 03 Feb, 2026 09:59 AM IST

बार देखा गया : 297

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

क़ुर्बान मैं उनकी बख़्शिश के,
मक़सद भी ज़बाँ पर आया नहीं

बिन माँगे दिया और इतना दिया,
दामन में हमारे समाया नहीं

ईमान मिला उनके सदक़े, क़ुरआन मिला उनके सदक़े,
रहमान मिला उनके सदक़े, वो क्या है जो हमने पाया नहीं

उनका तो शिआर करीमी है,
माइल-ब-करम ही रहते हैं

जब याद किया ऐ सल्ले-अला,
वो आ ही गए, तड़पाया नहीं

जो दुश्मन-ए-जाँ थे उनको भी दी,
तुमने अमाँ अपनों की तरह!

ये अफ़्व-ओ-करम अल्लाह अल्लाह,
ये ख़ुल्क़ किसी ने पाया नहीं

वो रहमत कैसी रहमत है,
मफ़हूम समझ लो रहमत का,

उसको भी गले से लगाया है,
जिसे अपना किसी ने बनाया नहीं

मौनिस हैं वही मजबूरों के,
ग़मख़्वार हैं सब मजबूरों के,

सरकार-ए-मदीना ने तन्हा,
किस-किस का बोझ उठाया नहीं

दिल भर गए मंगतों के लेकिन,
देने से तेरी नियत न भरी,

जो आया उसे भर-भर के दिया,
महरूम कभी लौटाया नहीं

आवाज़-ए-करम देता ही रहा,
थक हार गए लेने वाले!

मंगतों की हमेशा लाज रखी,
महरूम कभी लौटाया नहीं

रहमत का भरम भी तुम से है,
शफ़क़त का भरम भी तुम से है,

ठुकराए हुए इंसान को भी,
तुमने तो कभी ठुकराया नहीं

ख़ुर्शीद-ए-क़यामत की ताबिश,
माना कि क़यामत ही होगी,

हम उनके हैं घबराएँ क्यों,
क्या हम पे नबी का साया नहीं

उस मोहसिन-ए-आज़म के यूँ तो,
ख़ालिद पे हज़ारों एहसान हैं,

क़ुर्बान मगर उस एहसान के,
एहसान भी क्या तू जताया नहीं

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम हुज़ूर ﷺ की उदारता, क्षमा और उनके महान चरित्र का एक भावपूर्ण वर्णन है। इसमें कवि ने बताया है कि नबी की कृपा असीमित है, जो माँगने से पहले ही झोली भर देती है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि नबी ﷺ की दयालुता इतनी महान है कि उन्होंने अपनी जान के दुश्मनों को भी अपनों जैसी पनाह दी। वे हर उस मजबूर इंसान के मददगार हैं जिसे दुनिया ने ठुकरा दिया, और उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे उपकार करके कभी जताते नहीं हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
बख़्शिशदान या क्षमा
शिआरस्वभाव या आदत
अफ़्व-ओ-करमक्षमा और कृपा
ख़ुल्क़आचरण या नैतिकता (Character)
मफ़हूमअर्थ या सारांश
मौनिस / ग़मख़्वारहमदर्द या दुख बाँटने वाला
ख़ुर्शीद-ए-क़यामतप्रलय के दिन का सूरज
ताबिशचमक या तपिश (तेज़ गर्मी)

सारांश (Summary)

इस नात का सारांश यह है कि हमें ईमान, ईश्वर की पहचान और जीवन का मार्ग सब नबी $SAW$ के माध्यम से मिला है। उनका दरबार वह स्थान है जहाँ भिखारी (मंगते) थक सकते हैं, लेकिन उनकी दया कभी कम नहीं होती। अंत में कवि कहता है कि प्रलय की कठिनाइयों में भी हमें डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि हमारे पास नबी ﷺ की रहमत का साया है।

इस नात के अनुसार, रसूल-अल्लाह (स.अ.व.) का अपने दुश्मनों के साथ कैसा व्यवहार था, और उनकी उदारता (सखावत) की सबसे बड़ी निशानी क्या बताई गई है?

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