सदाए गुम्बद-ए-ख़ज़रा हुसैन जीत गए
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टाइटल : जमाल-ए-गुम्बद-ए-ख़ज़रा कहाँ से लाओगे
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: अमीनुल्लाह बलरामपुरी
जोड़ा गया : 21 Jun, 2026 12:40 PM IST
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जमाल-ए-गुम्बद-ए-ख़ज़रा कहाँ से लाओगे,
नबी से फिर के उजाला कहाँ से लाओगे।
हज़ार बार पुकारो अज़ान दुनिया में,
तमाम उम्र पुकारो अज़ान काबे से,
मगर बिलाल सा लहजा कहाँ से लाओगे।
जमाल-ए-गुम्बद-ए-ख़ज़रा कहाँ से लाओगे,
नबी से फिर के उजाला कहाँ से लाओगे।
नबी के दीन पे मिटने की बात करते हो,
हुसैन जैसा कलेजा कहाँ से लाओगे।
जमाल-ए-गुम्बद-ए-ख़ज़रा कहाँ से लाओगे,
नबी से फिर के उजाला कहाँ से लाओगे।
है पूरे हिन्द में क़ब्ज़ा हमारे ख़्वाजा का,
हमारे ख़्वाजा के जैसा कहाँ से लाओगे।
जमाल-ए-गुम्बद-ए-ख़ज़रा कहाँ से लाओगे,
नबी से फिर के उजाला कहाँ से लाओगे।
करोड़ों लोग हों जिसमें सिवाए अख़्तर के,
बताओ ऐसा जनाज़ा कहाँ से लाओगे।
वो जिनकी ज़ात पे तक़वा भी नाज़ करता है,
मिसाल-ए-ताजुश्शरिया कहाँ से लाओगे।
जमाल-ए-गुम्बद-ए-ख़ज़रा कहाँ से लाओगे,
नबी से फिर के उजाला कहाँ से लाओगे।
कोई है मुस्तफ़ा-ए-आज़म तो कोई अख़्तर है,
रज़ा के जैसा घराना कहाँ से लाओगे।
जमाल-ए-गुम्बद-ए-ख़ज़रा कहाँ से लाओगे,
नबी से फिर के उजाला कहाँ से लाओगे।
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यह हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की अज़मत, उनके वफ़ादारों और उनके मुक़द्दस घराने की बेमिसाल शान का बयान है, जिसमें बताया गया है कि उनके दर से मुँह मोड़कर कहीं हिदायत का उजाला नहीं मिल सकता।
इस कलाम का मतलब है कि हुज़ूर ﷺ की ज़ात और उनसे जुड़ी हर निस्बत बेमिसाल है। शायर कहता है कि दुनिया या काबे से चाहे जितनी बार अज़ान दी जाए, मगर हज़रत बिलाल जैसा इश्क़ भरा लहज़ा और दीन-ए-इस्लाम पर सब कुछ क़ुर्बान करने के लिए इमाम हुसैन जैसा जिगर और हौसला दोबारा नहीं लाया जा सकता।
| शब्द | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| जमाल-ए-गुम्बद-ए-ख़ज़रा | हरे गुम्बद की ख़ूबसूरती / सौंदर्य |
| लहजा | पुकारने का अंदाज़ / आवाज़ |
| कलेजा | हिम्मत / गहरा हौसला या जिगर |
| तक़वा | परहेज़गारी / ईश्वर-भय या पवित्रता |
| मिसाल-ए-ताजुश्शरिया | ताजुश्शरिया (एक महान सूफ़ी संत) जैसी मिसाल / उदाहरण |
| ज़ात | वजूद / शख्शियत या अस्तित्व |
इस नात में बताया गया है कि कशिश-ए-मदीना, हज़रत बिलाल का शौक़-ए-अज़ान, और कर्बला में इमाम हुसैन की क़ुर्बानी जैसी मिसालें पूरी कायनात में अद्वितीय हैं। इसके साथ ही हिन्द में ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की विलायत और बरेली के 'रज़ा घराने' की इल्मी व रूहानी शान को बेमिसाल बताते हुए अक़ीदत पेश की गई है।
शायर के मुताबिक, "नबी के दीन पे मिटने" के लिए किसके जैसे कलेजे (हौसले) की ज़रूरत होती है, और हिंद में किस बुज़ुर्ग का क़ब्ज़ा बताया गया है?