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मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा Lyrics In हिन्दी

(मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा, करबला में आया है फ़ातिमा का शहज़ादा)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) मर्सिया/नोहा नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: मोहसिन रज़ा तहसीनी

जोड़ा गया : 22 Jun, 2026 08:59 AM IST

बार देखा गया : 10

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा,
करबला में आया है फ़ातिमा का शहज़ादा।

मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा।

जिसने दीन की खातिर अपना सर कटा डाला,
वो अली का बेटा है फ़ातिमा का शहज़ादा।

करबला में आया है फ़ातिमा का शहज़ादा।

ज़ालिमों के हाथों में कैसे हाथ दे देता,
दीन का सितारा है फ़ातिमा का शहज़ादा।

करबला में आया है फ़ातिमा का शहज़ादा।

चाहते वो तो करबला में पानी खुद चला आता,
कितना सब्र वाला है फ़ातिमा का शहज़ादा।

मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा,
करबला में आया है फ़ातिमा का शहज़ादा।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह पंक्तियाँ हज़रत इमाम हुसैन के अदम्य साहस, उच्च आदर्शों और उनके अभूतपूर्व धैर्य (सब्र) को दर्शाती हैं, जिन्होंने अधर्म के आगे झुकने के बजाय धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि पैगंबर मोहम्मद (मुस्तफ़ा) के लाडले और हज़रत फ़ातिमा के शहज़ादे (इमाम हुसैन) सत्य की रक्षा के लिए कर्बला के मैदान में आए हैं। उन्होंने इस्लाम की हिफ़ाज़त के लिए अपना शीश कटवा दिया, लेकिन अत्याचारियों के आगे हाथ नहीं फैलाया। प्यास की तड़प होने के बावजूद उन्होंने ईश्वरीय इच्छा के सामने बेमिसाल सब्र का परिचय दिया।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
मुस्तफ़ा (Mustafa)पैगंबर मोहम्मद साहब का एक पवित्र नाम (चुना हुआ)
शहज़ादा (Shehzada)राजकुमार / प्रिय पुत्र (Prince)
दीन (Deen)धर्म / इस्लाम (Religion)
ख़ातिर (Khatir)के लिए / के वास्ते (For the sake of)
ज़ालिमों (Zaalimon)अत्याचारियों / ज़ुल्म करने वालों (Oppressors)
सब्र (Sabr)धैर्य / संतोष (Patience)

सारांश (Summary)

इस कलाम का सार यह है कि इमाम हुसैन धर्म के वो चमकते सितारे हैं जिन्होंने कर्बला में सत्य को जीवित रखने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा दी। उनके पास वह आत्मिक शक्ति थी कि वह चाहते तो पानी खुद उनके पास चला आता, लेकिन उन्होंने अल्लाह की रज़ा के लिए प्यासा रहकर अभूतपूर्व धैर्य दिखाया और बुराई के सामने कभी घुटने नहीं टेके।

इस कलाम के मुताबिक, फ़ातिमा के शहज़ादे ने किस चीज़ की ख़ातिर अपना सर कटा दिया और उनकी कौन सी सबसे बड़ी ख़ूबी (गुण) का ज़िक्र आख़िरी पंक्तियों में है?

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