کاش میں دورِ حسینی میں آیا ہوتا
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टाइटल : सदाए गुम्बद-ए-ख़ज़रा हुसैन जीत गए
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) मर्सिया/नोहा नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : संदल जलालपुरी
नातख्वान/कलाकार: संदल जलालपुरी
जोड़ा गया : 18 Jun, 2026 07:20 AM IST
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सदाए गुम्बद-ए-ख़ज़रा, हुसैन जीत गए,
मचल के कहता है काबा, हुसैन जीत गए।
जो कर्बला में हुई जंग हक़-ओ-बातिल की,
यज़ीद उस में तो हारा, हुसैन जीत गए।
सदाए गुम्बद-ए-ख़ज़रा, हुसैन जीत गए,
मचल के कहता है काबा, हुसैन जीत गए।
सर-ए-हुसैन तो सज्दे में कट गया लेकिन,
गवाही देता है सज्दा, हुसैन जीत गए।
सदाए गुम्बद-ए-ख़ज़रा, हुसैन जीत गए,
मचल के कहता है काबा, हुसैन जीत गए।
हुसैनी बज़्म में जितने हुसैनी बैठे हैं,
लगा रहे हैं ये नारा, हुसैन जीत गए।
सदाए गुम्बद-ए-ख़ज़रा, हुसैन जीत गए,
मचल के कहता है काबा, हुसैन जीत गए।
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यह हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की हक़ के लिए हुई अज़ीम फतह और यज़ीद के ज़ुल्म पर उनकी रूहानी जीत का बयान है, जिसमें बताया गया है कि सर कटाने के बाद भी उन्होंने दीन-ए-इस्लाम को हमेशा के लिए ज़िंदा कर दिया।
इस कलाम का मतलब है कि करबला में हक़ और बातिल (सत्य और असत्य) के बीच जो जंग हुई, उसमें यज़ीद अपनी ताक़त के बावजूद हार गया और इमाम हुसैन हमेशा के लिए जीत गए। शायर कहता है कि भले ही इमाम हुसैन का पाक सर सज्दे की हालत में कट गया, लेकिन उनका वह आख़िरी सज्दा आज भी कयामत तक के लिए उनकी जीत की गवाही दे रहा है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| सदाए | आवाज़ (Voice) |
| गुम्बद-ए-ख़ज़रा | मदीना शरीफ का हरा गुम्बद (Green Dome) |
| मचल के | झूम कर / चाव से (Enthusiastically) |
| हक़-ओ-बातिल | सत्य और असत्य (Truth and Falsehood) |
| सर-ए-हुसैन | इमाम हुसैन का सर (Head of Imam Hussain) |
| बज़्म | महफ़िल / सभा (Gathering) |
करबला के मैदान में ज़ुल्म के ख़िलाफ़ इमाम हुसैन ने जो बेमिसाल क़ुर्बानी दी, उसने बातिल को नेस्तनाबूद कर दिया। मदीने के सब्ज़ गुम्बद से लेकर मक्के के काबे तक, पूरी कायनात इमाम हुसैन की जीत का ऐलान कर रही है, और आज भी हर हुसैनी महफ़िल में इसी हक़ की जीत का नारा गूंज रहा है।
इस कलाम के मुताबिक, सर कट जाने के बाद भी इमाम हुसैन की फ़तह (जीत) की गवाही कौन दे रहा है?