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तैबा से फ़ातिमा के दुलारे निकल पड़े Lyrics In हिन्दी

(तैबा से फ़ातिमा के दुलारे निकल पड़े, जान-ए-अली नबी के नवासे निकल पड़े)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : तैबा से फ़ातिमा के दुलारे निकल पड़े

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) मर्सिया/नोहा नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 22 Jun, 2026 06:09 AM IST

बार देखा गया : 14

Time to read: 1 min read

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तैबा से फ़ातिमा के दुलारे निकल पड़े,
जान-ए-अली नबी के नवासे निकल पड़े।

पानी भी बंद कर दिया आल-ए-रसूल का,
असगर की प्यास देख के आँसू निकल पड़े।

तैबा से फ़ातिमा के दुलारे निकल पड़े,
जान-ए-अली नबी के नवासे निकल पड़े।

कर्बला की सरज़मीन पर पहुँचे जो अहल-ए-बैत,
चारों तरफ़ से घेरे ज़ालिम निकल पड़े।

तैबा से फ़ातिमा के दुलारे निकल पड़े,
जान-ए-अली नबी के नवासे निकल पड़े।

औन-ओ-मोहम्मद गए शब्बीर पे सवार,
लेके रज़ा हुसैन ये अकबर निकल पड़े।

तैबा से फ़ातिमा के दुलारे निकल पड़े,
जान-ए-अली नबी के नवासे निकल पड़े।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह पंक्तियाँ कर्बला के दर्दनाक और ऐतिहासिक मंज़र को बयान करती हैं, जहाँ हज़रत इमाम हुसैन और उनका पाक परिवार (अहल-ए-बैत) दीन-ए-इस्लाम की हिफ़ाज़त के लिए मदीना शरीफ़ से रवाना हुआ और उन पर ज़ुल्म ढाए गए।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हज़रत फ़ातिमा के लाडले और हज़रत अली के प्राण, यानी नबी ﷺ के नवासे (इमाम हुसैन) मदीना से हक़ की राह में निकल पड़े हैं। कर्बला की तपती धरती पर ज़ालिमों ने नबी के परिवार का पानी तक बंद कर दिया, जिससे मासूम अली असग़र की प्यास देखकर आँखों में आँसू आ गए और चारों तरफ़ से दुश्मनों ने उन्हें घेर लिया।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
तैबा (Taiba)मदीना शरीफ़ (Medina)
आल-ए-रसूल (Aal-e-Rasool)रसूल अल्लाह ﷺ का घराना / वंशज (Family of the Prophet)
अहल-ए-बैत (Ahl-e-Bait)नबी ﷺ का पवित्र परिवार (People of the Prophet's House)
सरज़मीन (Sar-Zameen)धरती / भूमि (Land)
ज़ालिम (Zaalim)अत्याचार करने वाले / उत्पीड़क (Oppressors)
रज़ा (Raza)अनुमति / आज्ञा (Permission)

सारांश (Summary)

इन पंक्तियों में इमाम हुसैन और उनके परिवार की महान क़ुरबानी का ज़िक्र है। जब अहल-ए-बैत कर्बला पहुंचे, तो दुश्मनों ने उनका पानी बंद कर दिया, यहाँ तक कि नन्हे अली असग़र की प्यास ने सबको रुला दिया। इसके बावजूद, इस पाक घराने के जांबाज़ों ने इमाम हुसैन से इजाज़त (रज़ा) लेकर सत्य और धर्म की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी।

इमाम हुसैन और उनके परिवार का पानी किस सरज़मीन पर बंद किया गया था, और उनके नन्हे बेटे का क्या नाम था जिनकी प्यास का ज़िक्र इस कलाम में है?

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