प्यासी है सकीना
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टाइटल : मुझे माँ तेरी जो याद आए बहुत रुलाए सताए
श्रेणी (कटेगरी) : नज़्म के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : शरीफ आहिल नूर
नातख्वान/कलाकार: वजाहत वास्ति
जोड़ा गया : 23 May, 2026 05:55 AM IST
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मुझे माँ तेरी जो याद आए, बहुत रुलाए सताए
मैं किसको पुकारूँगा माँ तेरे बदले,
किसे माँ कहूँगा ये बतलाइएगा
मुझे माँ तेरी जो याद आए, बहुत रुलाए सताए
मेरा हाथ थामा तो चलना सिखाया,
मुझे ज़िंदगी में संभलना सिखाया,
तेरी कुर्बतों ने क्यों आदी बनाया,
मुझे अपनी ममता के साए बिठाकर,
चलूँगा मैं अब कैसे तन्हा जहाँ में,
बस एक बार आकर कह जाइएगा
मुझे माँ तेरी जो याद आए, बहुत रुलाए सताए
मिलता था दीदार जिसका ख़ुदा से,
निगाहों में आहिल वो सूरत नहीं है,
थी ख़ुल्द-ए-बरी जिसके क़दमों के नीचे,
मेरे पास में अब वो उल्फ़त नहीं है,
हक़ीक़त में अब तो ये मुमकिन नहीं है,
मगर ख़्वाब में आके मुस्काइएगा,
जीना है तेरे बिना, जीना है तेरे बिना,
जीना है अब मुझको तेरे बिना
मुझे माँ तेरी जो याद आए, बहुत रुलाए सताए
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यह एक बेटे का अपनी दिवंगत माँ के लिए गहरा दर्द और उनकी जुदाई का बयान है, जिसमें बताया गया है कि माँ के जाने के बाद ज़िंदगी कितनी अकेली और मुश्किल हो गई है, और उनकी यादें दिल को बहुत तड़पाती हैं।
इस गीत का अर्थ है कि माँ के चले जाने के बाद अब उनका स्थान कोई नहीं ले सकता और उनके बिना यह संसार बिल्कुल सूना हो गया है। शायर माँ के उस लाड-प्यार और परवरिश को याद करता है जिसने उसे चलना और संभलना सिखाया, और अब वह अपनी माँ से गुज़ारिश करता है कि हक़ीक़त में न सही, पर कम से कम ख़्वाब में आकर ही उसे एक बार मुस्कुराकर देख लें।
| शब्द | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| कुर्बतों | नज़दीकियाँ / समीपता (माँ का साथ) |
| तन्हा | अकेला / एकाकी |
| जहाँ | दुनिया / संसार |
| दीदार | दर्शन / झलक |
| ख़ुल्द-ए-बरी | उच्च जन्नत / स्वर्ग का सबसे श्रेष्ठ बाग़ |
| उल्फ़त | प्रेम / मोहब्बत |
माँ का इस दुनिया से जाना एक ऐसा शून्य है जिसे कोई नहीं भर सकता, क्योंकि उनके कदमों के नीचे जन्नत थी और उनका चेहरा ईश्वर के दर्शन जैसा पवित्र था। शायर कहता है कि माँ की ममता की छाँव के बिना अब इस संसार में अकेले आगे बढ़ना नामुमकिन सा लगता है। अब जब हक़ीक़त में उनका लौटना मुमकिन नहीं है, तो बेटा बस यही दुआ करता है कि माँ सपनों में आकर ही सही, एक बार मुस्कुरा दें ताकि उसे जीने का हौसला मिल सके।
शायर के मुताबिक, माँ के कदमों के नीचे क्या था जिसके लिए अब वह तरस रहा है, और हक़ीक़त में मुलाक़ात नामुमकिन होने पर वह माँ से कहाँ आने की गुज़ारिश कर रहा है?