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इतना मुझको ना रुलाओ अब बुलाओ या नबी Lyrics In हिन्दी

(इतना मुझको ना रुलाओ अब बुलाओ या नबी, रोजा अपना तो दिखाओ, अब बुलाओ या नबी)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : इतना मुझको ना रुलाओ अब बुलाओ या नबी

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 27 Feb, 2026 06:12 AM IST

बार देखा गया : 154

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

इतना मुझको ना रुलाओ, अब बुलाओ या नबी
रोजा अपना तो दिखाओ, अब बुलाओ या नबी

अब बुलाओ या नबी.....

रोजे से है जो बरसता, आपका वो नूर है 
हम बिना देखे है आशिक़, आपका वो नूर है
जलवा - ए - रोजा हमें तो दिखाओ या नबी

अब बुलाओ या नबी.....

इतना मुझको ना रुलाओ,अब बुलाओ या नबी..
अब बुलाओ या नबी........

दिल में है तस्वीर उतारी, हर सांस में हुज़ूर है 
नाम लेते लगता ऐसा, हर दर्द से हम दूर हैं 
रहमतों की छांव में हमको बिताओ या नबी

दिल में है वो जलवागर ,  हर सांस में हुज़ूर है 
नाम लेते लगता ऐसा, हर दर्द से हम दूर हैं 
रहमतों की छांव में हमको बिठओ ओ या नबी

अब बुलाओ या नबी.....

इतना मुझको ना रुलाओ ,अब बुलाओ या नबी...
अब बुलाओ या नबी.....

हमको भी आका कभी, दिखलाइ -ए अब वो जहां 
दिल को अपने थाम के, बैठे हुए हैं हम गदा 
दिल की हसरत को मिटाओ, अब बुलाओ या नबी

अब बुलाओ या नबी.....

इतना हमको ना रुलाओ अब बुलाओ या नहीं....
अब बुलाओ या नबी.....

दो जहां के बादशाह और हम फकीरों के नबी 
फैज़ रोता है यहां, कर दो करम इस पर अभी 
अपनी गलियों की फ़ज़ाओ से मिलाओ या नबी

अब बुलाओ या नबी.....

इतना मुझको ना रुलाओ अब बुलाओ या नबी......
अब बुलाओ या नबी.....

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह भावुक नात एक भक्त की अपने प्रिय नबी (ﷺ) से मिलने की गहरी तड़प और व्याकुलता को दर्शाती है। इसमें विरह की पीड़ा और मदीने की ज़ियारत (दर्शन) की तीव्र इच्छा व्यक्त की गई है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों में भक्त प्रार्थना कर रहा है कि अब विरह के आँसू और न बहवाएं और उसे मदीने बुला लें। वह कहता है कि हमने आपको देखा नहीं, फिर भी हम आपके नूर के दीवाने हैं; बस अब एक बार उस पवित्र रोज़े (मज़ार) का दीदार करा दीजिए ताकि दिल को चैन मिल सके।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
रोज़ाहज़रत मुहम्मद (ﷺ) का पावन मज़ार
जलवा-ए-रोज़ापवित्र मज़ार का दिव्य दर्शन
जलवागरजो हृदय में विराजमान या प्रकट हो
गदाभिखारी या द्वार पर बैठा याचक
हसरतअधूरी इच्छा या तीव्र अभिलाषा
फ़ैज़कवि का नाम (अर्थ: लाभ या कृपा)
फ़ज़ाओंवातावरण या हवाओं

सारांश (Summary)

इस नात का सारांश यह है कि भक्त के रोम-रोम में हुज़ूर (ﷺ) की याद बसी है और उनका नाम ही उसके हर दुख की दवा है। वह स्वयं को एक फ़कीर और उन्हें 'दो जहाँ का बादशाह' मानते हुए याचना करता है कि उसे अपनी रहमतों की छाँव में बुला लें और उसकी आँखों को मदीने की गलियों का दीदार नसीब फरमाएं।

शायर ने "हम बिना देखे हैं आशिक" कहकर इश्क़-ए-रसूल ﷺ के किस पाकीज़ा जज़्बे की ओर इशारा किया है?

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