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नाना ले लो सलाम अब हमारा Lyrics In हिन्दी

(नाना ले लो सलाम अब हमारा, सुए करबल जा रहा है बेटा तुम्हारा)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : नाना ले लो सलाम अब हमारा

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स) सलात ओ सलाम के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : शब्बीर अहसन मुनव्वरी

नातख्वान/कलाकार: शब्बीर अहसन मुनव्वरी

जोड़ा गया : 11 Jul, 2024 12:15 PM IST

बार देखा गया : 1.1K

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

नाना ले लो सलाम अब हमारा,
आक़ा ले लो सलाम अब हमारा,
नाना ले लो सलाम अब हमारा,
सुए करबल जा रहा है बेटा तुम्हारा

नाना ले लो सलाम अब हमारा,
नाना ले लो सलाम अब हमारा,
नाना ले लो सलाम अब हमारा,
सुए करबल जा रहा है नाती तुम्हारा

छेह माह का लाड़ला, असगर भी है साथ में,
अब्बास कासिम भी है, अकबर भी है साथ में,
फिर मदीने में ना होगा आना दोबारा,
नाना ले लो सलाम अब हमारा

नाना ले लो सलाम अब हमारा,
आक़ा ले लो सलाम अब हमारा,
सुए करबल जा रहा है बेटा तुम्हारा

नेज़े पे कुरान को, चड़ कर सुनाने चले,
गर्दन को सजदे में हम, अपनी कटाने चले,
करबला में पूरा होगा वादा हमारा,
नाना ले लो सलाम अब हमारा

नाना ले लो सलाम अब हमारा,
आक़ा ले लो सलाम अब हमारा,
सुए करबल जा रहा है बेटा तुम्हारा

घर पर मेरी लाड़ली, सुगरा वो बीमार है,
कमज़ोर है इस कदर, चलने से लाचार है,
मेरी बेटी की हिफाज़त करना खुदारा,
नाना ले लो सलाम अब हमारा

नाना ले लो सलाम अब हमारा,
आक़ा ले लो सलाम अब हमारा,
सुए करबल जा रहा है नाती तुम्हारा
नाना ले लो सलाम अब हमारा

पाता था दिल यह सुकून, गुंबद हरा देख कर,
यानि दरे-सरवरे, हर दूसरा देख कर,
याद आएगा बोहोत यह रोज़ा तुम्हारा,
नाना ले लो सलाम अब हमारा

नाना ले लो सलाम अब हमारा,
नाना ले लो सलाम अब हमारा,
सुए करबल जा रहा है बेटा तुम्हारा
नाना ले लो सलाम अब हमारा

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम उस समय का वर्णन करता है जब इमाम हुसैन (र.अ.) मदीना छोड़कर कर्बला की ओर प्रस्थान कर रहे थे। यह अपने नाना, नबी-ए-करीम ﷺ के रौज़े से उनकी अंतिम विदाई और भावभीने सलाम का ज़िक्र है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों में इमाम हुसैन (र.अ.) अपने नाना ﷺ को अलविदा कह रहे हैं और बता रहे हैं कि वे अपने मासूम बच्चों और वफ़ादार साथियों के साथ दीन की रक्षा के लिए जा रहे हैं। वे अपनी बीमार बेटी (बीबी सुगरा) की हिफ़ाज़त की दुआ करते हैं और जानते हैं कि अब उनका मदीना वापस आना संभव नहीं होगा।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
सुए करबलकर्बला की ओर
नातीबेटी का बेटा (दोहता)
नेज़ाभाला
लाचारबेबस या मजबूर
खुदाराखुदा के लिए
दरे-सरवरेआक़ा ﷺ का दर (दरवाज़ा)
रौज़ापवित्र मज़ार

सारांश (Summary)

इस कलाम का सार यह है कि इमाम हुसैन (र.अ.) ने सत्य और इस्लाम की खातिर अपना घर और प्रिय शहर मदीना छोड़ दिया। यह विदाई इस बात का प्रतीक है कि उन्होंने अल्लाह से किए गए वादे को निभाने के लिए अपनी जान और माल की कुर्बानी देना स्वीकार किया, ताकि हक़ हमेशा के लिए ज़िंदा रहे।

मदीना छोड़ते वक़्त, गुम्बद-ए-ख़िज़रा और रौज़ा-ए-रसूल ﷺ को देख कर इमाम हुसैन (र.अ.) के दिल को जो सुकून मिलता था, उसके बारे में आखिरी मिसरों में क्या कहा गया है?

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