मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स) सलात ओ सलाम के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : कलामे आलाहज़रत (इमाम अहमद रज़ा)
नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी असद रज़ा अत्तारी हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी ओवैस रज़ा कादरी सज्जाद निज़ामी (मरहूम) विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 22 Sep, 2023 06:51 AM IST
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मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
शहरे यार-ए-इरम तज्दारे हरम,
नौ बहारे शफ़ात पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
हम गरीबों के आका ﷺ पे बेहद दुरूद,
हम फ़क़ीरों के शरवत पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
जिस सुहानी घड़ी चमका ताइबा का चाँद,
उस दिल-आफ़्रोज़-ए-सआत पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
जिस तरफ उठ गई दम में दम आ गया,
उस निगाह-ए-इनायत पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
जिसके माथे शफ़ात का शहरा सजा,
उस जाबिन-ए-सादत पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
जिनके सजदे को महरब-ए-काबा झुकी,
उन भावों की लताफ़त पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
जिसको धोखे से कूफ़े बुलाया गया,
जिसको बैठे-बिठाए सताया गया,
जिसके भाई को ज़हर पिलाया गया,
जिसके बच्चों को प्यासा रुलाया गया,
उस हुसैन इब्ने हयदार पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
जिसने हक़ करबला में अदा कर दिया,
अनपे नाना का वादा वफ़ा कर दिया,
घर का घर सब सुपुर्दे खुदा कर दिया,
कर लिया नोष जिसने शहादत का जाम,
उस हुसैन इब्ने हयदार पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
जिनकी माँ फ़ातिमा और है नाना रसूल ﷺ,
कितनी पाकीज़ा है उनके कदमों की धूल,
मरहबा मरहबा वो है आले रसूल ﷺ,
कितने महके हुए हैं मदीने के फूल,
करबला तेरी क़िस्मत पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
गौस-ए-आज़म, इमामों तो क़वां नुका,
जल्वा-ए-शन-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
दूर और नज़दीक के सुनने वाले वो कान,
काने लाले करामात पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
काश महसार में जब उनकी आमद हो,
और भेजे सब उनकी सौकत पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
सैय्यदा ज़ाहिरा तईयबा ताहीरा,oooo
जान-ए-अहमद ﷺ की राहत पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
दाल दी क़लब में आज़्मते मुस्तफा ﷺ,
सैय्यादी आला हज़रत पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
सुल्ह-कुल्ली जले और वहाबी मरे,
मस्लक-ए-आला हज़रत पे लाखों सलाम
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
मुझसे ख़िदमत के क़ुद्सी कहे हन रज़ा,
मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम,
शाम-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
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यह सलाम हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की अज़मत और कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों का एक हसीन संगम है, जिसमें दीन की राह दिखाने वाले रहबरों पर अकीदत के फूल पेश किए गए हैं।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि मुस्तफा ﷺ पूरी कायनात के लिए रहमत की जान हैं और भटके हुओं के लिए हिदायत की महफिल की शमा (रौशनी) हैं। शायर इमाम हुसैन की शहादत का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि उन्होंने कर्बला में अपना सब कुछ खुदा की राह में कुर्बान कर के हक़ का परचम बुलंद किया।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| जाने रहमत | दया और कृपा की जान (Soul of Mercy) |
| बज़्म-ए-हिदायत | मार्गदर्शन की सभा (Assembly of Guidance) |
| शफ़ात | सिफारिश (Intercession) |
| निगाह-ए-इनायत | दया की दृष्टि (Glance of Grace) |
| पाकीज़ा | पवित्र (Pure/Holy) |
| आले रसूल | नबी का खानदान (Progeny of Prophet) |
| सुपुर्दे खुदा | ईश्वर को सौंप देना (Entrusted to God) |
इस सलाम का सार यह है कि ईमान की असल ताज़गी हुज़ूर ﷺ और उनके अहले-बैत (परिवार) की मोहब्बत में है। इसमें जहाँ एक ओर हुज़ूर ﷺ की शान का बयान है, वहीं दूसरी ओर अहले-बैत की पाकीज़गी और इमाम हुसैन के सब्र व ईसार को सलाम पेश किया गया है।
इस सलाम के मुताबिक, कर्बला में किसने अपना घर-बार खुदा के सुपुर्द करके नाना का वादा वफ़ा किया?