क़ुर्बान मैं उनकी बख़्शिश के मक़सद भी ज़बाँ पर आया नहीं
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टाइटल : दर्द-ए-दिल कर मुझे अता या रब
श्रेणी (कटेगरी) : हम्द के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 07 Aug, 2023 09:11 AM IST
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दर्द-ए-दिल कर मुझे अता या रब,
दे मेरे दर्द की दवा या रब।
बे-सबब बख़्श दे, न पूछ आमाल,
नाम ग़फ़्फ़ार है तेरा या रब।
यूँ गुमूँ के मैं तुझसे मिल जाऊँ,
यूँ गुमा इस तरह मिला या रब।
ऐब मेरे न खोल महशर में,
नाम सत्तार है तेरा या रब।
हर भले की भलाई का सदका,
मुझ निकम्मे को कर भला या रब।
लाज रख ले गुनाहगारों की,
नाम रहमान है तेरा या रब।
ख़ाक कर अपने आस्ताने की,
यूँ हमें ख़ाक में मिला या रब।
मेरी आँखें मेरे लिए तरसें,
मुझसे ऐसा मुझे छुपा या रब।
तीस कम हो न दर्द-ए-उल्फ़त की,
दिल तड़पता रहे मेरा या रब।
तेरी जानिब ये मुश्त-ए-ख़ाक उड़े,
भेज ऐसी कोई हवा या रब।
सबाक़त रहमती आला ग़ज़बी,
तूने जब से सुना दिया या रब।
तू आसरा है हम गुनाहगारों का,
और मज़बूत हो गया या रब।
अहले सुन्नत की हर जमात पर,
हर जगह हो तेरी अता या रब।
दुश्मनों के लिए हिदायत की,
तुझसे करता हूँ इल्तिज़ा या रब।
मेरी माँ, मेरी बहनें, भांजे सब,
पाएँ आराम-ए-दो सरा या रब।
और भी जितने प्यारे हैं,
हाजतें सब की हो रवा या रब।
मेरे अहबाब पर भी फ़ज़्ल रहे,
तेरा तेरे हबीब का या रब।
तू हसन को उठा हसन करके,
हो आमाल खैर ख़ातिमा या रब।
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यह पंक्तियाँ ईश्वर (अल्लाह) की बारगाह में की गई एक अत्यंत भावपूर्ण प्रार्थना (मुनाजात) हैं, जिसमें एक भक्त अपने गुनाहों की माफ़ी, अहंकार की मुक्ति और ईश्वर के प्रेम में विलीन हो जाने की याचना करता है। इसमें ईश्वर के दयालु और क्षमाशील स्वरूप का आश्रय लेकर दोनों जहान की भलाई माँगी गई है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हे ईश्वर, मुझे अपने प्रेम का ऐसा दर्द दे जो मुझे तुझसे जोड़ दे और कयामत के दिन मेरे पापों को क्षमा कर मेरे ऐबों पर पर्दा डाल दे। शायर कहता है कि मेरी अपनी कोई नेकी नहीं है, बस तेरे 'गफ़्फ़ार' (माफ़ करने वाले) और 'सत्तार' (ऐब छुपाने वाले) नाम का सहारा है, जिसके सदके मुझे और मेरे सभी अपनों को दोनों जहान का सुकून अता कर।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| बे-सबब | बिना किसी कारण के / अकारण |
| आमाल | कर्म / कार्य (Deeds) |
| महशर | प्रलय का मैदान / न्याय का दिन (Day of Judgment) |
| आस्ताने | चौखट / दरबार |
| मुश्त-ए-ख़ाक | मुट्ठी भर धूल (मनुष्य के शरीर के लिए इस्तेमाल) |
| इल्तिज़ा | प्रार्थना / गुज़ारिश |
| आराम-ए-दो सरा | दोनों जहान (इस दुनिया और परलोक) का आराम |
| अहबाब | दोस्त / मित्रगण |
| ख़ैर ख़ातिमा | जीवन का अंत भलाई और ईमान के साथ होना |
इस प्रार्थना में ईश्वर से अपनी पहचान मिटाकर उसके रंग में रंग जाने और दुश्मनों तक को सही राह (हिदायत) दिखाने की दुआ की गई है। शायर 'हसन' अंत में अपने माता-पिता, परिवार, मित्रों और पूरी कौम की खुशहाली की कामना करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि जब इस दुनिया से उनका बुलावा आए, तो उनका अंत भलाई और अच्छे कर्मों के साथ हो।
शायर ने अल्लाह के कौन से दो सिफ़ाती नामों (गुणों) का ज़िक्र करके अपने गुनाहों की बख्शिश और ऐब छुपाने की दुआ की है?