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दिल दर्द से बिस्मिल की तरह लोट रहा हो Lyrics In हिन्दी

(दिल दर्द से बिस्मिल की तरह लोट रहा हो, सीने पे तसल्ली को तेरा हाथ धरा हो)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : दिल दर्द से बिस्मिल की तरह लोट रहा हो

श्रेणी (कटेगरी) : हम्द के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात

जोड़ा गया : 07 Aug, 2023 09:08 AM IST

बार देखा गया : 514

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

दिल दर्द से बिस्मिल की तरह लोट रहा हो,
सीने पे तसल्ली को तेरा हाथ धरा हो।

क्यों अपनी गली में वो रवादार सदा हो,
जो भीख लिए राह-ए-गदा देख रहा हो।

गिर वक़्त-ए-अजल सर तेरी चौखट पे झुका हो,
जितनी हो क़ज़ा एक ही सज्दे में अदा हो।

हमसाया-ए-रहमत है तेरा साया-ए-दीवार,
रुतबा से तुनज़ुल करे तो ज़िल्ल-ए-हुमा हो।

मौक़ूफ़ नहीं सुबह क़यामत ही पे ये अर्ज़,
जब आँख खुले सामने तू जलवा-नुमा हो।

दे उसको तू नज़ा अगर हूर भी सागर,
मुँह फेर ले जो तिश्ना-ए-दीदार तेरा हो।

फ़िर्दौस के बाग़ों से उधर मिल नहीं सकता,
जो कोई मदीने के बयाबान में घूमा हो।

देखा उन्हें महशर में तो रहमत ने पुकारा,
आज़ाद है जो आप के दामन से बंधा हो।

आता है फ़क़ीरों पे इन्हें प्यार कुछ ऐसा,
ख़ुद भीख दें और ख़ुद कहें मागते का भला हो।

ढूँढा ही करे सादर क़यामत के सिपाही,
वो किसको मिले जो तेरे दामन में छुपा हो।

जब देने को भीख आये सर-ए-कवाय गदाया,
लब पर ये दुआ थी मरे मागते का भला हो।

झुक कर उन्हें मिलना है हर एक ख़ाकनशीन से,
किस वास्ते नीचा न वो दामन-ए-उबा हो।

तुमको तो ग़ुलामों से है कुछ ऐसी मोहब्बत,
है तर्क-ए-अदब वरना कहीं हम पे फ़िदा हो।

दे डालिए अपने लब-ए-जाँ बख़्श का सदका,
ऐ चारा-ए-दिल दर्द-ए-हसन की भी दवा हो।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह पंक्तियाँ नबी-ए-करीम ﷺ की बारगाह में लिखी गई एक बेहद भावुक नात हैं, जिसमें उनके प्रति अटूट प्रेम, दीदार की तड़प और उनकी शफ़ाअत (मदद) का ज़िक्र है। इसमें एक तड़पता हुआ दिल मौत और कयामत के कठिन समय में हुज़ूर ﷺ के साए और सहारे की भीख माँग रहा है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि जब मौत का वक़्त (वक़्त-ए-अजल) आए, तो मेरा सिर हुज़ूर ﷺ की चौखट पर झुका हो और मेरी आँख खुलते ही मुझे उनका दीदार नसीब हो। शायर कहता है कि जो इंसान हुज़ूर ﷺ के दामन से बंधा है, उसे कयामत के मैदान में कोई परेशानी नहीं छू सकती, क्योंकि अल्लाह की रहमत खुद उसकी हिफ़ाज़त करती है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
बिस्मिलघायल / तड़पता हुआ परिंदा
वक़्त-ए-अजलमृत्यु का समय / मौत का वक़्त
क़ज़ाछूटी हुई नमाज़ / मौत
जलवा-नुमाप्रकट होना / सामने हाज़िर होना
तिश्ना-ए-दीदारदर्शन का प्यासा / दीदार की चाह रखने वाला
बयाबानजंगल / रेगिस्तान (यहाँ मदीने के सहरा से मुराद है)
महशरकयामत का मैदान / न्याय का दिन
ख़ाकनशीनज़मीन या मिट्टी पर बैठने वाला / विनम्र इंसान
चारा-ए-दिलदिल का इलाज करने वाला (हुज़ूर ﷺ)

सारांश (Summary)

इस नात-ए-पाक में हुज़ूर ﷺ के दर की फ़क़ीरी को जन्नत के बाग़ों से भी बढ़कर बताया गया है। शायर 'हसन' कहते हैं कि हमारे नबी ﷺ अपने ग़ुलामों और ग़रीबों से इतनी बेपनाह मोहब्बत करते हैं कि कयामत के सिपाही (फ़रिश्ते) उस शख़्स को कभी सज़ा नहीं दे सकते जो उनके दामन के साए में छुप गया हो। अंत में वे अपने दुखी दिल के लिए हुज़ूर ﷺ से शिफ़ा की भीख माँगते हैं।

शायर ने मौत के वक्त और आँख खुलने पर किस चीज़ की तमन्ना की है, और उनके मुताबिक कयामत के दिन कौन अज़ाब से महफ़ूज़ रहेगा?

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