मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : अपने रब का ये फरमान है
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स) कव्वाली के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: मोहम्मद अली तबरेज़
जोड़ा गया : 01 Sep, 2025 08:34 AM IST
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जिस तरह करते हो तुम काबे का दीदार,
आँखों में आदब रख के, उसी तरह से देखो
जब जब भी सताए जो, तुम्हें ख्वाइसे जन्नत,
माँ बाप के चेहरे को बड़े गौर से देखो
ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ
अपने रब का ये फरमान है,
वो तो क़िस्मत का सुल्तान है,
अपने माँ बाप के वास्ते,
जिंदगी जिसकी कुर्बान है
ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ
हस्र तक भी अगर तेरी खिदमत करूं,
दूध का कर्ज़ भी मैं चूका ना सकूँ
चांद सूरज भी गर मैं समेठूँ अगर,
चाहतों का तेरे नूर ला ना सकून
अपने रब का ये फरमान है,
वो तो क़िस्मत का सुल्तान है,
अपने माँ बाप के वास्ते,
जिंदगी जिसकी कुर्बान है
ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ
हादसे कैसे छु पाएंगे,
माँ मेरी जब निगहबान है
लेके निकला हुन माँ की दुआ,
मुझपे किस्मत भी महेरबान है
अपने रब का ये फरमान है,
वो तो क़िस्मत का सुल्तान है,
अपने माँ बाप के वास्ते,
जिंदगी जिसकी कुर्बान है
ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ
माँ की ममता मिली, माँ का दामन मिला,
प्यारा-प्यारा मुझे कैसा बचपन मिला
तेरे साये तले मैं सवरने लगा,
तेरी चश्मे करम का जो बंधन मिला
सांस हर सांस पर तो मेरी,
माँ की ममता का एहसान है
साथ माँ है तो हर दर्द से,
दिल हमारा ये अंजान है
अपने रब का ये फरमान है,
वो तो क़िस्मत का सुल्तान है,
अपने माँ बाप के वास्ते,
जिंदगी जिसकी कुर्बान है
ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ
वो शरारत मेरी, वो मोहब्बत तेरी,
मुझे याद आया फिर से बचपन मेरा
मेरी हर बात पर हामी भरता हुआ,
मुझे तड़पा गया देख बंधन तेरा
जो ना पहचाने ये मरतबा,
कितना कमज़र्फ इंसान है
जो सताते हैं माँ बाप को,
वो कहां का मुसलमान है
अपने रब का ये फरमान है,
वो तो क़िस्मत का सुल्तान है,
अपने माँ बाप के वास्ते,
जिंदगी जिसकी कुर्बान है
ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ, ऐ माँ
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यह कलाम माता-पिता की महानता और उनकी निस्वार्थ सेवा के महत्व को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि माँ-बाप की सेवा करना और उनका सम्मान करना ही ईश्वर की सच्ची इबादत और जन्नत का रास्ता है।
इन पंक्तियों में शायर कहता है कि जैसे काबा का सम्मान किया जाता है, वैसे ही माँ-बाप को अदब से देखना चाहिए क्योंकि उनका चेहरा देखना भी इबादत है। माँ की ममता का कर्ज पूरी उम्र की सेवा से भी नहीं चुकाया जा सकता, और जिसकी माँ उसकी रक्षक (निगहबान) हो, उसका नसीब खुद-ब-खुद संवर जाता है।
| शब्द (Word) | अर्थ - Meaning (English/Hindi) |
|---|---|
| दीदार (Deedar) | Vision / दर्शन या देखना |
| निगहबान (Nigehbaan) | Protector / रक्षक या रखवाला |
| चश्मे करम (Chashme Karam) | Eye of Grace / दया की नज़र |
| मरतबा (Martaba) | Status / सम्मानजनक पद या दर्जा |
| कमज़र्फ (Kamzarf) | Mean or Shallow / नीच या छोटी सोच वाला |
| हामी भरना (Haami Bharna) | To agree / समर्थन करना या हाँ कहना |
इस गीत का सार यह है कि माँ-बाप की दुआएं इंसान की किस्मत बदल देती हैं और उसे हर हादसे से महफूज रखती हैं। जो इंसान अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करता, वह असल में इंसानियत के दर्जे से गिरा हुआ है। माँ की ममता का साया ही दुनिया की सबसे बड़ी दौलत और सुकून है।
बोलों के आखिर में उन लोगों के बारे में क्या कहा गया है जो अपने माँ-बाप को सताते हैं, और उनके किरदार को कैसे बयान किया गया है?