नबी नबी या नबी नबी
- 9 महीने पहले fiber_manual_record 2.5K बार देखा गया
टाइटल : मेरे सरकार आए
श्रेणी (कटेगरी) : कव्वाली के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अज़ीज़ मियां
नातख्वान/कलाकार: साबरी ब्रदर्स
जोड़ा गया : 04 Sep, 2025 08:42 PM IST
बार देखा गया : 719
Time to read: 2 min read
बारा रबीउल अव्वल के दिन अब्र-ए-बहार छाए,
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए।
आमिना तेरे घर आकर जिब्रईल पैग़ाम ये लाए,
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए।
दूर हुआ दुनिया से अंधेरा, आए आका हुआ सवेरा,
अब्दुल्लाह के घर आँगन खुशियों के बादल छाए,
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए।
सूनी थी मक्का की गलियाँ, सूखी थी गुलशन में कलियाँ,
उनके क़दम से चारों जानिब हो गए नूर के साए,
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए।
मुश्किल तेरी टल जाएगी, सूखी खेती फल जाएगी,
दाई हलीमा तेरे सोए भाग जगाने आए,
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए।
जो हैं सब नबियों के रहबर, जाने मसीहा ख़ल्क़ के रहबर,
झोली भरना काम है जिनका, आज वो दाता आए,
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए।
मुझको निदा आई ये मोहसिन, दुनिया को बतला दे मोहसिन,
जो है नबी का चाहने वाला, वो अपने घर को सजाए,
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए।
This summary is AI-generated • Reviewed for quality.
यह कलाम 12 रबीउल अव्वल यानी ईद-ए-मिलाद-उन-नबी की बरकतों और खुशियों का वर्णन है। इसमें बताया गया है कि हुज़ूर (स.अ.व) के आने से दुनिया का कुफ्र और अंधेरा छंट गया और हर तरफ रहमत की बरसात होने लगी।
इन पंक्तियों का उद्देश्य नबी (स.अ.व) के आगमन से प्रकृति और मानवता पर हुए सकारात्मक प्रभाव को दर्शाना है। मक्का की सूखी कलियों के खिलने से लेकर दाई हलीमा की किस्मत चमकने तक, यह कलाम यह संदेश देता है कि उनके आने से हर बेसहारा को सहारा मिला और दुनिया को एक सच्चा रहबर (मार्गदर्शक) प्राप्त हुआ।
| Word | Meaning (Hindi/English) |
|---|---|
| अब्र-ए-बहार | बसंत के बादल (Spring Clouds) |
| पैग़ाम | संदेश (Message) |
| चारों जानिब | चारों ओर (On all sides) |
| नूर | दिव्य प्रकाश (Divine Light) |
| रहबर | मार्गदर्शक (Guide/Leader) |
| मसीहा | संकटमोचक/उपचारक (Healer/Savior) |
| ख़ल्क़ | दुनिया/सृष्टि (Creation/Mankind) |
| निदा | पुकार/आवाज़ (Voice/Call) |
इस कलाम का सार यह है कि हुज़ूर (स.अ.व) का जन्म पूरी कायनात के लिए सबसे बड़ी नियामत है। उनके आने से दुनिया में ज्ञान का सवेरा हुआ और दुखियों की झोलियाँ भरने वाला 'दाता' तशरीफ़ लाया। शायर 'मोहसिन' अंत में कहते हैं कि नबी से मुहब्बत करने वाले का यह कर्तव्य है कि वह इस महान खुशी में अपने घर और दिल को सजाए।
नात के मक़्ता (आख़िर) में "मोहसिन" (शायर) ने नबी से मोहब्बत करने वालों को क्या करने का मशवरा दिया है, और उन्हें किस बात की "निदा" (आवाज़) आई है?