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आज रंग है री माँ Lyrics In हिन्दी

(आज रंग है री माँ, मेरे महबूब के घर रंग है री)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : आज रंग है री माँ

श्रेणी (कटेगरी) : कव्वाली के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : हजरत अमीर खुसरो

नातख्वान/कलाकार: रईस मियां

जोड़ा गया : 27 Jun, 2023 05:59 AM IST

बार देखा गया : 610

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

आज रंग है ऐ माँ रंग है री,
मेरे महबूब के घर रंग है री।
अरे अल्लाह तू है हर,
मेरे महबूब के घर रंग है री।

मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया,
निजामुद्दीन औलिया-अलाउद्दीन औलिया।
अलाउद्दीन औलिया, फरीदुद्दीन औलिया,
फरीदुद्दीन औलिया, कुताबुद्दीन औलिया।
कुताबुद्दीन औलिया मोइनुद्दीन औलिया,
मुइनुद्दीन औलिया मुहैय्योद्दीन औलिया।
आ मुहैय्योदीन औलिया, मुहैय्योदीन औलिया।
वो तो जहाँ देखो मोरे संग है री।

अरे ऐ री सखी री,
वो तो जहाँ देखो मोरो (बर) संग है री।
मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया,
आहे, आहे आहे वा।
मुँह माँगे बर संग है री,
वो तो मुँह माँगे बर संग है री।

निजामुद्दीन औलिया जग उजियारो,
जग उजियारो जगत उजियारो।
वो तो मुँह माँगे बर संग है री।
मैं पीर पायो निजामुद्दीन औलिया।
गंज शकर मोरे संग है री।
मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखयो सखी री।
मैं तो ऐसी रंग देस-बदेस में ढूढ़ फिरी हूँ,
देस-बदेस में।
आहे, आहे आहे वा,
ऐ गोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मुँह माँगे बर संग है री।

सजन मिलावरा इस आँगन मा।
सजन, सजन तन सजन मिलावरा।
इस आँगन में उस आँगन में।
अरे इस आँगन में वो तो, उस आँगन में।
अरे वो तो जहाँ देखो मोरे संग है री।
आज रंग है ए माँ रंग है री।

ऐ तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मैं तो तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मुँह माँगे बर संग है री।
मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी सखी री।
ऐ महबूबे इलाही मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी।
देस विदेश में ढूँढ़ फिरी हूँ।
आज रंग है ऐ माँ रंग है ही।
मेरे महबूब के घर रंग है री।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह सूफी संतों की परंपरा का सबसे विख्यात रूहानी कलाम (कव्वाली) है, जिसे हज़रत अमीर ख़ुसरो ने अपने गुरु (मुर्शिद) हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की शान में लिखा है। यह कलाम आध्यात्मिक आनंद और गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाता है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि अमीर ख़ुसरो अपनी माँ और सखियों से परम आनंद की स्थिति साझा कर रहे हैं कि आज मेरे प्रिय (मुर्शिद) के घर में रूहानी खुशियों और ईश्वर की भक्ति का रंग बरसा है। मुझे मेरे गुरु हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया मिल गए हैं, जो अब मैं जहाँ भी देखता हूँ, हर पल मेरे आत्मिक संग रहते हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
रंगरूहानी या आध्यात्मिक आनंद (ईश्वरीय प्रेम का रंग)
महबूबप्रिय / प्रियतम (यहाँ अर्थ गुरु हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया से है)
पीर / औलियाआध्यात्मिक गुरु / अल्लाह के वली या संत
मुँह माँगे बरमुँह माँगा वरदान या आध्यात्मिक आशीष
जग उजियारोसंसार को रोशन करने वाला / पूरे जगत को ज्ञान देने वाला
सजन मिलावराप्रियतम से मिलन / मिलन की घड़ी

सारांश (Summary)

इस सूफियाना कलाम का मुख्य सार यह है कि जब किसी साधक को सच्चा गुरु मिल जाता है, तो उसकी पूरी दुनिया ईश्वरीय प्रेम के रंग में रंग जाती है। अमीर ख़ुसरो कहते हैं कि उन्होंने ऐसा दिव्य और पावन रंग पूरे देश-विदेश में कहीं नहीं देखा, जो उन्हें निज़ामुद्दीन औलिया के दर पर मिला है। चिश्ती सिलसिले के महान संतों का नाम लेते हुए वह कहते हैं कि उनके मुर्शिद पूरे संसार को अपनी रूहानी रोशनी से आलोकित करने वाले हैं और अपने भक्तों को मुँह माँगी मुरादें बख्शते हैं।

लिरिक्स के मुताबिक, हज़रत अमीर ख़ुसरो ने पूरी दुनिया (देस बदेस) में ढूंढने के बाद किसका रंग पसंद आने की बात कही है?

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