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मेरे मोला करम हो करम Lyrics In हिन्दी

(मेरे मोला करम हो करम, जाये तो कहाँ जाये तेरे दर के सिवा मोला)


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टाइटल : मेरे मोला करम हो करम

श्रेणी (कटेगरी) : हम्द के बोल (लीरिक्स) कलाम के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : समीर

नातख्वान/कलाकार: वजाहत वास्ति

जोड़ा गया : 09 Jun, 2022 05:57 AM IST

बार देखा गया : 1.4K

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

जाये तो कहाँ जाये
तेरे दर के सिवा मोला 

तस्कीन कहाँ पाए
तेरे दर के सिवा मोला

इस दुनिया में तेरे करम का साया
दामन कहाँ फैलाए
तेरे दर के सिवा मोला

मेरे मोला करम हो करम
मेरे मोला करम हो करम

तुम से फ़रियाद करते हैं हम
मेरे मोला करम हो करम

यह ज़मीन और यह आसमान
तेरे कब्ज़े मैं है दो जहाँ
सब पे तू ही तो है महेरबान

हम तेरे दर से जाये कहाँ
तू ही सुनता है सबकी सदा
तू ही रखता है सबके भरम

मेरे मोला करम हो करम
मेरे मोला करम हो करम
मेरे मोला करम हो करम

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह ईश्वर (अल्लाह) की स्तुति में रचा गया एक अत्यंत शांतिदायक और सुंदर गीत (हम्द) है, जिसमें एक भक्त अपने प्रभु के समक्ष अपनी विवशता और ईश्वर की सर्वशक्तिमानता को स्वीकार करता है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हे ईश्वर (मौला), आपके दर के अतिरिक्त हम असहायों का कोई और ठिकाना नहीं है, जहाँ हमारे व्याकुल हृदय को चैन और शांति (तस्कीन) मिल सके। इस पूरी दुनिया में केवल आपकी ही कृपा और दया का साया है, इसलिए हम आपके सिवा किसी और के सामने अपनी झोली (दामन) नहीं फैला सकते।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
तस्कीनआत्मिक शांति / सुकून
करमकृपा / दया या मेहरबानी
फ़रियादप्रार्थना / गुहार या याचना
सदाआवाज़ / पुकार
भरमसम्मान / लाज या मान-मर्यादा

सारांश (Summary)

इस हम्द में बताया गया है कि यह धरती, आकाश और दोनों जहान पूरी तरह से ईश्वर के ही नियंत्रण (क़ब्ज़े) में हैं और वही समस्त सृष्टि पर सबसे बड़ा मेहरबान है। वह बिना किसी भेदभाव के हर जीव की पुकार सुनता है और इंसानों की कमियों व गुनाहों को छिपाकर समाज में उनका सम्मान (भरम) बनाए रखता है। अंततः, एक इंसान हर संकट में केवल अपने मौला से ही दया की भीख मांगता है क्योंकि उसके सिवा कोई और रक्षक नहीं है।

हम्द के अनुसार, ज़मीन और आसमान के दोनों जहाँ किस के कब्ज़े में हैं और वह सब पर क्या रखता है?

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