मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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عنوان: Kismat Se Jiske Ghar Me Bhi Aati Hai Betiya
زمرہ: منقبت کے بول (لیرکس) نظم کے بول (لیرکس) نعت کے بول (لیرکس)
مصنف/گیتکار: دلکش رانچوی
نعت خوان/ فنکار: فہیم رضا حبیبی
شامل کیا گیا: 30 Dec, 2024 03:18 PM IST
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किस्मत से जिसके घर में भी आती हैं बेटियाँ
रहमत खुदा-ऐ-पाक की लाती हैं बेटियाँ
माँ बाप की सदाओं पे लब्बेक बोल कर
बेटों से पहले दौड़ के आती हैं बेटियाँ
बेटों से कम न समझो इन्हे दोस्तों कभी
सोऐ हुए नसीब जगाती हैं बेटियाँ
एक अजनबी के घर को बसाने के वास्ते
बाबुल के घर को छोड़ के जाती हैं बेटियाँ
आए लोग अब तो छोड़ दो तुम मांगना जहेज़ (दहेज)
फांसी गले में अपने लगाती हैं बेटियाँ
अब इससे बढ़ के कौनसी दौलत की तलब है
जन्नत तुमहरे घर को बनाती हैं बेटियाँ
बेटे हजारों ज़ुल्मों सितम करते हैं मगर
माँ बाप को कभी न सताती हैं बेटियाँ