माँ तेरा चेहरा है कितना निराला
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عنوان: Yeh Na Poocho Kidhar Ja Rahi Hun Aaj Main
زمرہ: منقبت کے بول (لیرکس)
مصنف/گیتکار: شمیم رضا فیضی
نعت خوان/ فنکار: شمیم رضا فیضی
شامل کیا گیا: 08 Sep, 2023 03:12 PM IST
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ये ना पूछो किधर जा रही हूं
आज मैं अपने घर जा रही हूं
मेरे बच्चों ना आंसू बहाना,
कब्र ही तो है असली ठिकाना
ये ना समझो के मर जा रही हूँ,
आज मैं अपने घर जा रही हूं
सामने रूये सरकार होगा,
कब्र में उनका दीदार होगा
बस यही सोच कर जा रही हूँ,
आज मैं अपने घर जा रही हूं
साथ मेरे नहीं सोना चाँदी,
हाथ मेरे है दोनों खाली
छोड़ कर माल ओ ज़र जा रही हूँ,
आज मैं अपने घर जा रही हूं
दफ़न करके मुझे ना भूलना,
कब्र पर तुम मेरी आना जाना
सुनलो लक्ते जिगर जा रही हुं,
आज मैं अपने घर जा रही हूं
सिर्फ दो गज का जोड़ा पहन कर,
शान से चार कंधो पर हो कर
देखो करके सफ़र जा रही हूँ,
आज मैं अपने घर जा रही हूं
ये ना पूछो किधर जा रही हूं
आज मैं अपने घर जा रही हूं