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ये ना पूछो किधर जा रही हूं आज मैं अपने घर जा रही हूं Lyrics In हिन्दी

(ये ना पूछो किधर जा रही हूं आज मैं अपने घर जा रही हूं, देखो करके सफ़र जा रही हूँ आज मैं अपने घर जा रही हूं)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : ये ना पूछो किधर जा रही हूं आज मैं अपने घर जा रही हूं

श्रेणी (कटेगरी) : मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी

नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी

जोड़ा गया : 12 Oct, 2022 01:34 PM IST

बार देखा गया : 11.9K

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

ये ना पूछो किधर जा रही हूं
आज मैं अपने घर जा रही हूं

मेरे बच्चों ना आंसू बहाना,
कब्र ही तो है असली ठिकाना

ये ना समझो के मर जा रही हूँ,
आज मैं अपने घर जा रही हूं

सामने रूये सरकार होगा,
कब्र में उनका दीदार होगा

बस यही सोच कर जा रही हूँ,
आज मैं अपने घर जा रही हूं

साथ मेरे नहीं सोना चाँदी,
हाथ मेरे है दोनों खाली

छोड़ कर माल ओ ज़र जा रही हूँ,
आज मैं अपने घर जा रही हूं

दफ़न करके मुझे ना भूलना,
कब्र पर तुम मेरी आना जाना

सुनलो लक्ते जिगर जा रही हुं,
आज मैं अपने घर जा रही हूं

सिर्फ दो गज का जोड़ा पहन कर,
शान से चार कंधो पर हो कर

देखो करके सफ़र जा रही हूँ
आज मैं अपने घर जा रही हूं

ये ना पूछो किधर जा रही हूं
आज मैं अपने घर जा रही हूं

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह जीवन की नश्वरता, मृत्यु की शाश्वत सच्चाई और परलोक (आख़िरत) के सफर का एक अत्यंत भावुक और सीख देने वाला वर्णन है, जिसमें एक माँ अपने बच्चों को ढांढस बंधाते हुए मृत्यु को जीवन का अंत नहीं, बल्कि अपने असली घर लौटने की यात्रा बताती है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि इस संसार से विदा लेते समय इंसान को दुखी नहीं होना चाहिए, क्योंकि कब्र ही हर जीव का अंतिम और वास्तविक ठिकाना है। एक सच्चे श्रद्धालु (मोमिन) के लिए मृत्यु का भय इसलिए समाप्त हो जाता है क्योंकि उसे विश्वास होता है कि कब्र के अंधेरे में उसे अपने प्यारे नबी (सरकार ﷺ) का दीदार (दर्शन) नसीब होगा।


शब्द-अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
ठिकानारहने का स्थान / गंतव्य
रूये सरकारपैगंबर साहब ﷺ का पवित्र मुखारविंद (चेहरा)
दीदारदर्शन / देखना
माल ओ ज़रधन-दौलत और सोना-चांदी
लक्ते जिगरजिगर का टुकड़ा (संतान/बच्चे)
दो गज का जोड़ाकफ़न का कपड़ा
चार कंधों परअर्थी या जनाज़े पर सवार होकर

सारांश (Summary)

मनुष्य इस नश्वर संसार में खाली हाथ आता है और अपनी सारी जमा-पूंजी तथा धन-दौलत यहीं छोड़कर खाली हाथ चला जाता है, जहाँ उसका आखिरी पहनावा सिर्फ दो गज का कफ़न होता है। इस कलाम के ज़रिए माँ अपने बच्चों से कहती है कि वे उसकी विदाई पर आँसू न बहाएँ और दफ़न करने के बाद भी उसकी कब्र पर आते-जाते रहें, क्योंकि वह इस सांसारिक मोह को छोड़कर अपने वास्तविक स्वामी के पास जा रही है।

शायर के अनुसार, कब्र में जाने पर उन्हें किस महान शख्सियत का 'दीदार' (दर्शन) नसीब होगा, जिसकी वजह से वह खुशी-खुशी इस सफर पर जा रही हैं?

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