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तैबा है हमारा तैबा है हमारा Lyrics In हिन्दी

(तैबा है हमारा तैबा है हमारा, दीवाने लगे कहने दिल ओ जान से प्यारा)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : तैबा है हमारा तैबा है हमारा

श्रेणी (कटेगरी) : हम्द के बोल (लीरिक्स) कलाम के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 12 Mar, 2024 10:49 AM IST

बार देखा गया : 433

Time to read: 2 min read

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तैबा है हमारा, तैबा है हमारा
तैबा है हमारा, तैबा है हमारा

दीवाने लगे कहने दिल ओ जान से प्यारा,
बहता है जहाँ चारों तरफ़ नूर का धारा

तैबा है हमारा, तैबा है हमारा

है सह्र-ए-मदीना में अजब कैफ़ का आलम,
रहमत की वहाँ होती है बरसात झम झम,
आराम जहाँ करते हैं सुलतान-ए-दो आलम,
होता है वहाँ चार सू जन्नत का नज़ारा

तैबा है हमारा, तैबा है हमारा

बु-ज़ाहेल की मुट्ठी में है क्या चीज़ बता दे,
और आसमान के चाँद को दो टुकड़े बना दे,
बेजान कंकड़ों को भी जो कलमा पढ़ा दे,
जिस सह्र में चमका है मुक़द्दर का सितारा

तैबा है हमारा, तैबा है हमारा

सरकार की आमद पे है मस्रूर ज़माना,
हर लब पे है आका-ए-दो आलम का तराना,
अब मेरे खुशी झूमकर कहता है दीवाना,
है खुल्दे बड़ी का जहाँ पुर कैफ़ नज़ारा

तैबा है हमारा, तैबा है हमारा

मुद्दत से जो थी प्यास लगी प्यास बुझाया,
शब्बीर ने करबला को लहू अपना पिलाया,
नाना की शरीयत के लिए सर को कटाया,
जिसको मिला है सिर्फ़ बहत्तर का सहारा

तैबा है हमारा, तैबा है हमारा

सरकार ने लकड़ी को भी तलवार बनाया,
कदमों के इशारों से दरख़्तों को बुलाया,
डूबे हुए सूरज को भी एक पल में फिराया,
हैदर है वही आमीना बीबी का दुलारा

तैबा है हमारा, तैबा है हमारा
तैबा है हमारा, तैबा है हमारा

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम मदीना मुनव्वरा (तैबा) की अज़मत और वहाँ की रूहानी खूबसूरती को समर्पित है। इसमें हुज़ूर ﷺ के चमत्कारों और मदीना की पवित्र फ़िज़ाओं का बहुत ही भावुक चित्रण किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

शायर कहता है कि मदीना वह पावन नगरी है जहाँ दोनों जहानों के सुल्तान ﷺ विश्राम कर रहे हैं और जहाँ हर तरफ़ नूर की धारा बहती है। यह वह शहर है जहाँ बेजान कंकड़ों ने कलमा पढ़ा और जहाँ की खातिर इमाम हुसैन (र.अ.) ने दीन को बचाने के लिए कर्बला में अपनी महान कुर्बानी दी।


सारांश (Summary)

शब्दअर्थ
तैबापवित्र/पावन (मदीना का दूसरा नाम)
कैफ़ का आलमरूहानी मस्ती या सुकून का माहौल
चार सूचारों दिशाओं में
मस्रूरप्रसन्न या खुश
खुल्दे बड़ीश्रेष्ठ जन्नत
दरख़्तपेड़
मुद्दतलंबा समय

सारांश (Summary)

इस नात का सार यह है कि मदीना हर आशिक-ए-रसूल के दिल का सुकून है, जहाँ हर पल जन्नत जैसा नज़ारा और रहमत की बारिश होती है। शायर नबी ﷺ के मोजिज़ों (चमत्कारों) और अहले-बैत की कुर्बानियों का ज़िक्र करते हुए गर्व से कहता है कि तैबा ही हमारा असली ठिकाना और सहारा है।

नात के आखिर में हज़रत अली (हैदर) का ज़िक्र करते हुए उनके और नबी ﷺ के किन मोअजीज़ात (miracles) का ज़िक्र किया गया है, और उन्हें किसका "दुलारा" कहा गया है?

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