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जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है Lyrics In हिन्दी

(जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है, यह इबरत की जा है तमाशा नहीं है)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 28 Dec, 2023 09:03 AM IST

बार देखा गया : 808

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

तू ख़ुशी के फूल लेगा कब तलक?
तू यहाँ ज़िन्दा रहेगा कब तलक?

एक दिन मरना है, आखिर मौत है
कर ले जो करना है, आखिर मौत है

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है
यह इबरत की जा है, तमाशा नहीं है

जहाँ में हैं इबरत के हर-सू नमूने
मगर तुझ को अँधा किया रंग-ओ-बू ने
कभी ग़ौर से यह भी देखा है तूने
जो आबाद थे वो महल अब हैं सूने

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है
यह इबरत की जा है, तमाशा नहीं है

मिले ख़ाक में अहल-ए-शान कैसे कैसे!
मकीन हो गए ला-मकान कैसे कैसे!
हुए नामवर बे-निशान कैसे कैसे!
ज़मीन खा गई नौजवान कैसे कैसे!

यही तुझ को धुन है—रहूँ सब से भला
हो ज़ीनत निराली, हो फ़ैशन निराला
जिया करता है क्या यूँ ही मरने वाला?
तुझे हुस्न-ए-ज़ाहिर ने धोखे में डाला

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है
यह इबरत की जा है, तमाशा नहीं है

क़ब्र में मय्यत उतरनी है ज़रूर
जैसी करनी वैसी भरनी है ज़रूर

दबदबा दुनिया में ही रह जाएगा
हुस्न तेरा ख़ाक में मिल जाएगा

बे-नमाज़ी तेरी शा‍मत आएगी
क़ब्र की दीवार बस मिल जाएगी

तोड़ देगी क़ब्र तेरी पसलियाँ
दोनों हाथों की मिलें जो उँगलियाँ

लंदन-ओ-पेरिस के सपने छोड़ दे
बस मदीने से ही रिश्ते जोड़ दे

बेवफ़ा दुनिया पर मत कर ऐतबार
तू अचानक मौत का होगा शिकार

कर ले तौबा, रब की रहमत है बड़ी
क़ब्र में वरना सज़ा होगी कड़ी

तुझे पहले बचपन ने बरसों खिलाया
जवानी ने फिर तुझ को मजनूँ बनाया
बुढ़ापे ने फिर आकर क्या-क्या सताया
अजल तेरी कर देगी बिल्कुल सफ़ाया

अजल ने न छोड़ा, न किसरा, न दारा
इसी से सिकन्दर सा फ़ातेह भी हारा
हर एक ले के क्या-क्या न हसरत सिधारा
पड़ा रह गया सब यूँ ही ठाठ सारा

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है
यह इबरत की जा है, तमाशा नहीं है

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह प्रसिद्ध नज़्म इंसान को दुनिया की नश्वरता (Futility) और मौत की अटल सच्चाई का अहसास दिलाती है, जिसका उद्देश्य मनुष्य को मोह-माया से जगाना है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि यह दुनिया स्थायी निवास नहीं बल्कि एक पाठशाला है जहाँ से हमें सबक (इबरत) लेना चाहिए। शायर कहता है कि बड़े-बड़े राजा, शूरवीर और सुंदर लोग मिट्टी में मिल गए, इसलिए दिखावे और फ़ैशन में समय गँवाने के बजाय इंसान को अपने कर्म सुधारने और ईश्वर से क्षमा (तौबा) माँगने पर ध्यान देना चाहिए।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
इबरतचेतावनी या शिक्षा (Lesson/Warning)
जा (जाह)जगह या स्थान
हर-सूहर तरफ या चारों ओर
अहल-ए-शानवैभवशाली या प्रतिष्ठित लोग
मकीनरहने वाले (निवासी)
ला-मकानबिना घर का (यहाँ अर्थ है 'क़ब्र')
अजलमृत्यु या मौत का समय
फ़ातेहविजेता (Conqueror)

सारांश (Summary)

इस कलाम का सार यह है कि मौत एक ऐसी हकीकत है जिससे सिकंदर जैसा विश्व-विजेता भी नहीं बच सका। इंसान बचपन, जवानी और बुढ़ापे के चक्र में फँसकर असलियत को भूल जाता है, जबकि अंत में उसे खाली हाथ क़ब्र में ही जाना है। शायर नसीहत देता है कि बाहरी सुंदरता और दुनिया के धोखे को छोड़कर नेक रास्ते पर चलो, क्योंकि यहाँ की शान-ओ-शौकत यहीं धरी रह जाएगी।

शायर ने दुनिया को "इबरत की जा" क्यों कहा है और सिकंदर का ज़िक्र किस लिए किया है?

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