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ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को Lyrics In हिन्दी

(ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को, कर देंगे तड़ीपार बुलाऊँ क्या रज़ा को)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात

जोड़ा गया : 01 Nov, 2026 04:35 PM IST

बार देखा गया : 14

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को,
ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को।

ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को,
कर देंगे तड़ीपार बुलाऊँ क्या रज़ा को।

तुम लोग यज़ीदी हो, बताते हो हुसैनी,
चल जाएगी तलवार बुलाऊँ क्या रज़ा को।

ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को।

ऐसे नहीं जाएगा तू बस्ती से हमारी,
पड़ जाएँगी दो-चार बुलाऊँ क्या रज़ा को।

ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को।

तू अपने अकीदे को बताता है ख़ज़ाना,
हो जाएगा भंगार बुलाऊँ क्या रज़ा को।

ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को,
ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम (मुनाज़रात या अंदाज़-ए-डिफा में कही गई शायरी) मुखालिफ़ीन के जवाब में और अपने अक़ीदे व बुज़ुर्गों की शान में कही गई है, जिसमें विरोधी नज़रिए पर तीखा तंज कसते हुए चुनौती दी गई है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों में शायर विरोधियों से मुखातिब होकर उनके दावों और अक़ीदों पर सवाल उठा रहा है और उन्हें उनके रवैये पर कड़ा जवाब देते हुए चुनौती दे रहा है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द

अर्थ (हिंदी / English)

दीन के गद्दार

धर्म के खिलाफ चलने वाले / Traitors of religion

तड़ीपार

शहर या इलाके से निकाला जाना / Banished or exiled

यज़ीदी

यज़ीद के रास्ते पर चलने वाले (अन्याय या असत्य का प्रतीक) / Follower of Yazid

अक़ीदा

विश्वास या मज़हबी नज़रिया / Belief or faith

भंगार

कबाड़ या बेकार चीज़ / Scrap or worthless

सारांश (Summary)

यह कलाम मुनाज़रे (बहस) और विरोध के अंदाज़ में है, जिसमें शायर ने मुखालिफ़िन की नीयत और उनके दावों की हकीकत पर सवाल उठाए हैं। इसमें अपने अक़ीदों की हिफ़ाज़त और मुखालिफ़िन को उनके गलत नजरिए पर कड़ा संदेश देने का ज़िक्र किया गया है।

इस कलाम में शायर ने मुखालिफिन को क्या कहकर पुकारा है और उनके किस दावे पर सवाल उठाया है؟

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