मतलबी ये दुनिया है मतलबी ज़माना है
- 14 घंटों पहले fiber_manual_record 13 बार देखा गया
टाइटल : बाँध लेना तिरंगे का सर पे कफ़न
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : दिल खैराबादी
नातख्वान/कलाकार: दिल खैराबादी
जोड़ा गया : 24 Aug, 2026 08:14 AM IST
बार देखा गया : 13
Time to read: 1 min read
बाँध लेना तिरंगे का सर पे कफ़न,
एक सच्चे मुसलमान की पहचान है।
कह के गद्दार बेआबरू मत करो,
आबरू-ए-वतन हर मुसलमान है।
बाँध लेना तिरंगे का सर पे कफ़न,
एक सच्चे मुसलमान की पहचान है।
वलियों जैसी थी जिसकी हर एक गुफ़्तगू,
दूध माँ ने पिलाया जिसे बावज़ू,
जिसके आगे भी अंग्रेज़ थर्रा गए,
नाम उस शेर का टीपू सुल्तान है।
बाँध लेना तिरंगे का सर पे कफ़न,
एक सच्चे मुसलमान की पहचान है।
सरहदों से अगर तुम गुज़रना कभी,
बेवफ़ाई वतन से न करना कभी,
जान दे देना अपने वतन के लिए,
उम्मती से नबी का ये फ़रमान है।
बाँध लेना तिरंगे का सर पे कफ़न,
एक सच्चे मुसलमान की पहचान है।
This summary is AI-generated • Reviewed for quality.
यह नज़्म एक सच्चे मुसलमान की अपने देश के प्रति अगाध निष्ठा, तिरंगे के प्रति सम्मान और वतन के लिए जान न्यौछावर करने के जज़्बे को बयां करती है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि देश की हिफ़ाज़त के लिए तिरंगे को अपने सिर का कफ़न बनाना और वतन से सच्ची वफ़ादारी रखना हर सच्चे मुसलमान की असली पहचान है, क्योंकि हर मुसलमान देश की आबरू का हिस्सा है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| तिरंगा | भारत का राष्ट्रीय ध्वज |
| कफ़न | शव को लपेटने वाला कपड़ा (यहाँ देश के लिए जान देने का प्रतीक) |
| बेआबरू | बेइज्जत करना, अपमानित करना |
| आबरू-ए-वतन | देश की इज़्ज़त और शान |
| बावज़ू | वज़ू की हालत में, पवित्र |
| फ़रमान | हुक्म, आदेश या निर्देश |
इस नज़्म में देशभक्ति और ईमान के गहरे रिश्ते को उजागर किया गया है। टीपू सुल्तान की बहादुरी और उनके पाकीज़ा किरदार की मिसाल देकर यह संदेश दिया गया है कि वतन से बेवफ़ाई न करना और देश के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर देना पैगंबर साहब के संदेश और हर सच्चे देशभक्त का कर्तव्य है।
नज़्म में टीपू सुल्तान की मिसाल किस तरह के जज़्बे को समझाने के लिए दी गई है और वतन से वफ़ादारी के बारे में क्या हुक्म बताया गया है?