ये न पूछो किधर जा रहा हूँ
- 1 दिन पहले fiber_manual_record 13 बार देखा गया
टाइटल : मतलबी ये दुनिया है मतलबी ज़माना है
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अज़मत रज़ा भागलपुरी
नातख्वान/कलाकार: अज़मत रज़ा भागलपुरी
जोड़ा गया : 24 Aug, 2026 09:16 AM IST
बार देखा गया : 24
Time to read: 2 min read
बात ये हक़ीक़त है, न कोई फ़साना है,
ख़ाली हाथ आए थे, ख़ाली हाथ जाना है।
मतलबी ये दुनिया है, मतलबी ज़माना है,
ख़ाली हाथ आए थे, ख़ाली हाथ जाना है।
चार दिन की दुनिया से, दिल लगाए बैठे हो,
मौत आएगी एक दिन, क्यों भुलाए बैठे हो?
माल और ये दौलत, कुछ न काम आना है,
ख़ाली हाथ आए थे, ख़ाली हाथ जाना है।
मतलबी ये दुनिया है, मतलबी ज़माना है,
ख़ाली हाथ आए थे, ख़ाली हाथ जाना है।
बाप और माँ को क्यों, हर घड़ी सताते हो?
वो तुम्हारी जन्नत हैं, क्यों उन्हें रुलाते हो?
याद रखो, मर के फिर रब को मुँह दिखाना है,
ख़ाली हाथ आए थे, ख़ाली हाथ जाना है।
मतलबी ये दुनिया है, मतलबी ज़माना है,
ख़ाली हाथ आए थे, ख़ाली हाथ जाना है।
बात ये हक़ीक़त है, न कोई फ़साना है,
ख़ाली हाथ आए थे, ख़ाली हाथ जाना है।
This summary is AI-generated • Reviewed for quality.
यह कलाम जीवन की नश्वरता, दुनिया के मतलबीपन, मौत की अटलता और माता-पिता के सम्मान व उनकी सेवा के महत्व को बहुत ही सीख देने वाले अंदाज़ में बयां करता है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि यह दुनिया और इसका स्वार्थी माहौल महज़ चंद दिनों का छलावा है, जहाँ इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही विदा होता है। इसलिए दौलत के पीछे भागने के बजाय अपने माता-पिता की खिदमत करनी चाहिए, क्योंकि एक दिन सबको अपने रब के सामने अपने कर्मों का हिसाब देना है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| हक़ीक़त | सच्चाई, वास्तविक सच |
| फ़साना | कहानी, किस्सा या कल्पना |
| मतलबी ज़माना | स्वार्थी दुनिया और लोग |
| माल और दौलत | धन-दौलत और दुनियावी संपत्ति |
| जन्नत | स्वर्ग (यहाँ माता-पिता की सेवा को जन्नत का जरिया बताया गया है) |
| मुँह दिखाना | सामना करना या जवाबदेह होना |
इस कलाम के ज़रिए इंसान को यह याद दिलाया गया है कि दुनिया की चकाचौंध और धन-दौलत सब यहीं छूट जाने वाली है; मौत का सामना हर हाल में होना है। इसके साथ ही माँ-बाप को सताने से मना किया गया है क्योंकि वे ही इंसान की असली जन्नत हैं और मरने के बाद हर शख्स को अपने परवरदिगार के दरबार में अपने आमाल का जवाब देना है।
कलाम में शायर ने दुनिया के किस सच को सबसे बड़ा 'फ़साना' या हक़ीक़त बताया है, और माँ-बाप को किस चीज़ का ज़रिया क़रार दिया है?