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लहू अपना बहाया करबला में Lyrics In हिन्दी

(लहू अपना बहाया करबला में, हुसैन इब्न-ए-अली ने करबला में)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : लहू अपना बहाया करबला में

श्रेणी (कटेगरी) : मनकबत के बोल (लीरिक्स) मर्सिया/नोहा नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 16 Jun, 2026 06:27 PM IST

बार देखा गया : 10

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

हुसैन इब्न-ए-अली ने करबला में,
लहू अपना बहाया करबला में

नबी के दीन को ज़ालिम से लोगों,
कटा के सर बचाया करबला में

हुसैन इब्न-ए-अली ने करबला में,
लहू अपना बहाया करबला में

कहा अब्बास ने बाज़ू कटा कर,
गवारा हर सितम है करबला में

हुसैन इब्न-ए-अली ने करबला में,
लहू अपना बहाया करबला में

किया नाना से बचपन में था वादा,
कटा के सर निभाया करबला में

हुसैन इब्न-ए-अली ने करबला में,
लहू अपना बहाया करबला में

कहा ज़ैनब ने यह असगर को लेकर,
चला प्यासा यह असगर करबला में

हुसैन इब्न-ए-अली ने करबला में,
लहू अपना बहाया करबला में

नदीम थे हुसैनी कुल बहत्तर (72),
हज़ारों को पछाड़ा करबला में

हुसैन इब्न-ए-अली ने करबला में,
लहू अपना बहाया करबला में

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम/नौहा इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफ़ादार साथियों की उन महान क़ुर्बानियों को याद करता है, जो उन्होंने दीन-ए-इस्लाम की हिफ़ाज़त और हक़ की जीत के लिए कर्बला के मैदान में दी थीं।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इस नौहे का मतलब है कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने कर्बला में अपना पवित्र लहू बहाकर इस्लाम को नया जीवन दिया। उन्होंने बचपन में अपने नाना (हज़रत मुहम्मद ﷺ) से जो वादा किया था, उसे ज़ालिम याज़िद के आगे सर न झुकाकर और अपना सर कटवाकर पूरी वफ़ादारी से निभाया।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
इब्न-ए-अलीअली के बेटे (हज़रत अली के सुपुत्र)
दीनधर्म / मज़हब (इस्लाम)
बाज़ूहाथ / भुजाएं
गवारामंज़ूर / स्वीकार
सतमज़ुल्म / अत्याचार
अतहर (यहाँ 'असगर' संदर्भ में)पाक / पवित्र (हज़रत अली असग़र, इमाम हुसैन के 6 महीने के बेटे)
पछाड़ाशिकस्त दी / बुरी तरह हरा दिया

सारांश (Summary)

कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन (अ.स.) के भाई हज़रत अब्बास ने अपने बाज़ू कटवा दिए और छह महीने के मासूम अली असग़र प्यासे ही शहीद हो गए। शायर 'नदीम' कहते हैं कि भले ही हुसैनी लश्कर की तादाद केवल बहत्तर (72) थी, लेकिन उनके हौसले और हक़ की ताक़त ने याज़िद की हज़ारों की ज़ालिम फ़ौज को वैचारिक और रूहानी तौर पर हमेशा के लिए हरा दिया।

इमाम हुसैन (अ.स.) के लश्कर में कुल कितने जाँसार शामिल थे, जिन्होंने हज़ारों की फ़ौज को कर्बला में पछाड़ा (शिकस्त दी)?

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