चमका माह-ए-नूर का हिलाल
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टाइटल : आज आए नबियों के सरदार मरहबा
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : ओवैस रज़ा कादरी
नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 16 Aug, 2026 05:09 PM IST
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आज आए नबियों के सरदार, मरहबा,
मरहबा आए क़ाफ़िला-सालार, मरहबा।
आमिना के दिलबर-ओ-दिलदार, मरहबा,
मरहबा आए महबूब-ए-ग़फ़्फ़ार, मरहबा।
शाद हो के आमद-ए-ख़ैरुल-वरा है आज,
ग़म के मारे बोल उठे ग़मख़्वार, मरहबा।
सब्ज़ परचम हाथ में लहरा के सब बोलो,
मक्की मदनी आए अरबी सरदार, मरहबा।
झूमता है वज्द में काबा ख़ुशी में आज,
कह रहे हैं मिम्बर-ओ-मीनार, मरहबा।
बस गई है वादी-ए-जाँ में नई महक,
तेरी आमद पर शह-ए-अबरार, मरहबा।
दो उबैद-ए-बे-हुनर को नात का शऊर,
कर रहा है प्यार से तकरार, मरहबा।
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यह नात पैग़ंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद ﷺ की आमद (पैदाइश) की खुशी और उनके जश्न का बयान है, जिसमें पूरी कायनात को झूमते हुए और आका ﷺ का इस्तकबाल करते हुए दिखाया गया है।
इन पंक्तियों का मतलब है कि आज तमाम नबियों के सरदार, बीवी आमिना के लाल और अल्लाह के महबूब दुनिया में तशरीफ लाए हैं। आपकी आमद से दुखों के मारे लोगों को सहारा मिल गया है और हर तरफ खुशी का माहौल है।
| Word (शब्द) | Meaning (अर्थ) |
|---|---|
| मरहबा (Marhaba) | स्वागत / खुश-आमदीद (Welcome) |
| क़ाफ़िला-सालार (Qafila-Salaar) | काफिले का सरदार या रहनुमा (Leader) |
| ख़ैरुल-वरा (Khair-Ul-Wara) | इंसानों में सबसे बेहतरीन यानी नबी ﷺ |
| सब्ज़ परचम (Subz Parcham) | हरा झंडा (Green Flag) |
| वज्द (Wajd) | रूहानी मस्ती या बेखुदी की हालत |
यह नात हुज़ूर ﷺ की विलादत की मुबारक घड़ी पर आधारित है। शायर कहता है कि आज के दिन मक्का और मदीना के मुकद्दस मुकाम, काबा, मिम्बर और मीनार सब खुशी से झूम रहे हैं और रूह में एक नई महक बस गई है, और शायर खुद भी नात कहने की तौफीक मांग रहा है।
इस नात में हुज़ूर ﷺ की आमद पर कौन सा हरा झंडा हाथ में लहरा कर खुशी मनाने का ज़िक्र किया गया है?