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ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली Lyrics In हिन्दी

(ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली, बन के मौज-ए-करम मुस्तफ़ा आ गए)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 16 Aug, 2026 05:42 PM IST

बार देखा गया : 7

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली,
बन के मौज-ए-करम, मुस्तफ़ा आ गए।

हल मेरी हो गईं ख़ुद-ब-ख़ुद मुश्किलें,
सारे आलम के मुश्किल-कुशा आ गए।

आ गए, आ गए, मुस्तफ़ा आ गए।

आमिना का मुक़द्दर सँवारा गया,
गोद में चाँद जिसकी उतारा गया,
हूर-ओ-ग़िलमाँ सलामी को झुकने लगे,
पढ़ते रिज़वाँ सल्ले अला आ गए।

आ गए, आ गए, मुस्तफ़ा आ गए।

दोनों आलम की क़िस्मत बदलने लगी,
नूर में सारी कौनैन ढलने लगी,
ख़ुश-मुक़द्दर, हलीमा मुबारक तुझे,
गोद में तेरी ख़ैरुल-वरा आ गए।

आ गए, आ गए, मुस्तफ़ा आ गए।

बन गई है ज़मीं रश्क-ए-बाग़-ए-जिन्नत,
सज गए आसमाँ, खिल उठा गुलसिताँ,
माँग लो रहमतें, खोल लो झोलियाँ,
देने ख़ैरात हाजत-रवा आ गए।

आ गए, आ गए, मुस्तफ़ा आ गए।

आज कोई भी साइम न ख़ाली रहे,
सब मुरादें मिलें, हर मुसीबत टले,
मदनी आका की आमद का सदक़ा मिले,
भीख लेने को हम या ख़ुदा आ गए।

आ गए, आ गए, मुस्तफ़ा आ गए।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात पैग़ंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की आमद की मुबारक घड़ी, उनकी रहमत और उनके दरबार से मिलने वाले फै़ज़ का बेहद खूबसूरत बयान है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का मतलब है कि हुज़ूर ﷺ के दुनिया में تشریف लाने से कायनात में रहमतों की ठंडी हवा चल पड़ी और तमाम मुश्किलें खुद-ब-खुद हल हो गईं। बीबी आमिना और बीबी हलीमा सादिया का मुक़द्दर संवर गया और पूरी दुनिया नूर से रोशन हो गई।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

Word (शब्द)Meaning (अर्थ)
मौज-ए-करम (Mauj-E-Karam)करम की लहर (Wave of Mercy)
मुश्किल-कुशा (Mushkil Kusha)मुश्किलें आसान करने वाले
हूर-ओ-ग़िलमाँ (Hoor-O-Ghulman)जन्नत की हूरें और खिदमतगार फरिश्ते
रिज़वाँ (Rizwan)जन्नत के दरवाज़े की देखभाल करने वाले फ़रिश्ते का नाम
हाजत-रवा (Hajat-Rawa)जरूरतें पूरी करने वाले

सारांश (Summary)

यह नात हुज़ूर ﷺ की विलादत की खुशी और जश्न को बयां करती है। शायर कहता है कि आका ﷺ की आमद से ज़मीन जन्नत का रश्क बन गई है, इसलिए सब अपनी झोलियाँ फैलाकर उनकी रहमतें और मुरादें मांग लें, क्योंकि वे सबकी हाजतें पूरी करने आए हैं।

इस नात में किसका मुक़द्दर संवरने और किसकी गोद में खैरुल् वरा ﷺ के आने का ज़िक्र किया गया है?

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