क़ुर्बान मैं उनकी बख़्शिश के मक़सद भी ज़बाँ पर आया नहीं
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टाइटल : जश्न-ए-आमद-ए-रसूल अल्लाह ही अल्लाह
श्रेणी (कटेगरी) : हम्द के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : आबिद बरेलवी
नातख्वान/कलाकार: फरहान अली कादरी
जोड़ा गया : 19 Aug, 2023 07:10 PM IST
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जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह,
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह
जब कि सरकार तशरीफ़ लाने लगे,
हूर-ओ-ग़िल्माँ भी ख़ुशियाँ मनाने लगे,
हर तरफ़ नूर की रौशनी छा गई,
मुस्तफ़ा क्या मिले , ज़िंदगी मिल गई,
ए हलीमा, तेरी गोद में आ गए,
दोनों आलम के रसूल, अल्लाह ही अल्लाह,
अल्लाह ही अल्लाह, बोलो, अल्लाह ही अल्लाह,
अल्लाह ही अल्लाह, बोलो, अल्लाह ही अल्लाह
जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह,
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह
चेहरा-ए-मुस्तफ़ा जब दिखाया गया,
झुक गए तारे और चाँद शर्मा गया,
आमिना देख कर मुस्कुरान॓ लगीं,
हव्वा, मरियम भी ख़ुशियाँ मनाने लगीं,
आमिना बीबी सब से ये कहने लगीं,
दुआ हो गई क़ुबूल, अल्लाह ही अल्लाह
अल्लाह ही अल्लाह, बोलो, अल्लाह ही अल्लाह,
अल्लाह ही अल्लाह, बोलो, अल्लाह ही अल्लाह
जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह,
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह
शादियाने ख़ुशी के बजाए गए,
शादी के नग़्मे सब को सुनाए गए,
हर तरफ़ शोर-ए-स़ल्ले-अ़ला हो गया,
आज पैदा हबीब-ए-ख़ुदा हो गया,
फिर तो जिब्रील ने भी ये एलां किया,
ये ख़ुदा के हैं रसूल, अल्लाह ही अल्लाह
अल्लाह ही अल्लाह, बोलो, अल्लाह ही अल्लाह,
अल्लाह ही अल्लाह, बोलो, अल्लाह ही अल्लाह
जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह,
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह
उन का साया ज़मीं पर न पाया गया,
नूर से नूर देखो जुदा न हुआ,
हम को, आबिद , नबी पर बड़ा नाज़ है,
क्या भला मेरे आक़ा, का अंदाज़ है,
जिस ने रुख पर मली वो ज़िया पा गया,
अर्ज़-ए-तयबा , तेरी धूल, अल्लाह ही अल्लाह
अल्लाह ही अल्लाह, बोलो, अल्लाह ही अल्लाह,
अल्लाह ही अल्लाह, बोलो, अल्लाह ही अल्लाह
जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह,
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह
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यह नात शरीफ़ हुज़ूर ﷺ की विलादत (जन्म) की ख़ुशी और उनकी अज़मत का बयान है, जिसमें बताया गया है कि उनके आने से पूरी कायनात रोशन हो गई और बीबी आमिना की गोद में दोनों जहाँ के रहनुमा तशरीफ़ लाए।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि जब सरकार-ए-दो-आलम ﷺ का आगमन हुआ, तो फ़रिश्तों और हूरों ने जश्न मनाया और हर तरफ़ नूर छा गया। शायर कहता है कि उनके चेहरे की चमक के आगे चाँद-तारे भी फीके पड़ गए और बीबी आमिना की बरसों की दुआ क़ुबूल हो गई।
| शब्द | अर्थ (हिंदी / English) |
|---|---|
| आमद | आगमन / Arrival |
| हूर-ओ-ग़िल्माँ | जन्नत के फ़रिश्ते / Celestial beings |
| दोनों आलम | दोनों जहाँ (धरती और स्वर्ग) / Both worlds |
| हबीब-ए-ख़ुदा | अल्लाह के प्यारे / Beloved of Allah |
| शादियाने | ख़ुशी के बाजे / Celebration drums |
| ज़िया | रौशनी / Light or Radiance |
हुज़ूर ﷺ की आमद पर ज़मीन और आसमान खुशियाँ मना रहे हैं और जिब्रील-ए-अमीन ने उनके अल्लाह का रसूल होने का एलान किया है। शायर कहता है कि नबी ﷺ का साया ज़मीन पर इसलिए नहीं था क्योंकि वे स्वयं एक नूर (प्रकाश) हैं, और उनके दर की धूल भी इंसान की तक़दीर सँवार देती है।
जब हुज़ूर ﷺ का चेहरा दिखाया गया तो चाँद और तारों पर क्या असर हुआ, और जिब्रील-ए-अमीन ने क्या एलान किया?