मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : दिल ठिकाना मेरे हुज़ूर का है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स) नज़्म के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : खालिद महमूद खालिद
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 03 Feb, 2026 09:41 AM IST
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दिल ठिकाना मेरे हुज़ूर का है,
ये जल्वा-ख़ाना मेरे हुज़ूर का है
एक पल में हज़ारों आलम में,
आना-जाना मेरे हुज़ूर का है
नेमतें सब वही खिलाते हैं,
दाना-दाना मेरे हुज़ूर का है
मुझ सा आसी कहाँ, मदीना कहाँ,
ये बुलाना मेरे हुज़ूर का है
रोज़-ए-महशर जो बख़्शवाएगा,
वो बहाना मेरे हुज़ूर का है
हश्र में उनके साथ उठेगा,
जो दीवाना मेरे हुज़ूर का है
जिन पे उतरी है आयत-ए-तत्हीर,
वो घराना मेरे हुज़ूर का है
ज़िक्र शामिल नमाज़ में ख़ालिद,
पंजगाना मेरे हुज़ूर का है
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यह नात शरीफ़ इस विश्वास को दर्शाती है कि पूरी कायनात और एक मोमिन का हृदय वास्तव में हुज़ूर (SAW) की सत्ता और उनकी याद का स्थान है। इसमें उनकी सर्वव्यापकता और उदारता का वर्णन किया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि संसार की हर सुख-सुविधा और जीवन का आधार (दाना-दाना) हुज़ूर (SAW) की ही देन है। कवि विनम्रता से कहता है कि मुझ जैसे गुनहगार का मदीने जाना मुमकिन न था, यह तो केवल उनका करम है कि उन्होंने मुझे अपने द्वार पर बुलाया।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जल्वा-ख़ाना | वह स्थान जहाँ नूर या वैभव प्रकट हो |
| आलम | संसार / जहान |
| आसी | पापी या गुनहगार |
| रोज़-ए-महशर | प्रलय (क़यामत) का दिन |
| आयत-ए-तत्हीर | पवित्रता की आयत (अहले-बैत की शुद्धि से संबंधित) |
| पंजगाना | पाँच समय की (नमाज़) |
इस कलाम का सारांश यह है कि सृष्टि की हर नेमत नबी SAW के माध्यम से प्राप्त होती है और न्याय के दिन (हश्र) वही हमारी मुक्ति का आधार बनेंगे। कवि 'ख़ालिद' के अनुसार, नमाज़ की पूर्णता भी उन्हीं के ज़िक्र से है और जो उनसे सच्चा प्रेम करता है, उसका अंत और पुनरुत्थान भी उन्हीं के सान्निध्य में होगा।
नात के आखिरी हिस्से के अनुसार, "खालिद" (शायर) के लिए कौन सा ज़िक्र पांचों वक्त की नमाज़ में शामिल है, और "आयत-ए-ततहीर" का ताल्लुक किसके घराने से है?