प्यासी है सकीना
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टाइटल : दिल ना दुखाना माँ को ना सताना
श्रेणी (कटेगरी) : नज़्म के बोल (लीरिक्स) कव्वाली के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अज़ीम नाज़ा
नातख्वान/कलाकार: अज़ीम नाज़ा
जोड़ा गया : 03 Jul, 2022 06:35 AM IST
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हर एक कदम पर खुद उसकी लाज रखता है
जो सर पे माँ की दुआओ का ताज रखता है (x2)
क्यूँ मैं मोहब्बतों मे वफ़ा से दगा करू
दिल से तेरे खयालों को कैसे जुदा करू
बीमार माँ है और वक्ते नमाज़ भी है
एक वक्त मे दो फ़र्ज़ को कैसे अदा करू
दिल ना दुखाना, माँ को ना सताना, माँ के चूम लेना कदम (x2)
अल्लाह की कसम मेरे मौला की कसम
दिल ना दुखाना, माँ को ना सताना, माँ के चूम लेना कदम (x2)
सबसे आज़ीम प्यारी है माँ की खिदमत (x2)
माँ के कदमों के नीचे तेरी जन्नत
सबसे आज़ीम प्यारी है माँ की खिदमत
माँ के कदमों के नीचे तेरी जन्नत
तेरे लिए तो माँ ने दुख उठाया (x2)
लोरिया गा के झूला भी झुलाया
तुझको खिलाती थी वो सोने नहीं देती (x2)
तुझको हसाती थी वो रोने नहीं देती
बच्चों के खातिर रब से यूं मांगे (x2)
करना मेरे अल्लाह करम
अल्लाह की कसम मेरे मौला की कसम
दिल ना दुखाना, माँ को ना सताना, माँ के चूम लेना कदम (x2)
या खुद हश्र मे मेरी इतनी ज़मानत रखना
मैं रहु या ना रहु पर माँ को सलामत रखना
बचपन मे माँ को तूने है पुकारा
माँ से बढ़कर नहीं है कोई प्यारा
उंगली पकड़ कर चलना है सिखाया
जब भी गिरता था माँ ने ही उठाया
माँ की दुआ से मेरे घर मे है बहार (x2)
औलाद है वो प्यारी माँ की खिदमत गुज़ार
रात भर वो जागी हमको संभाला
माँ पे नहीं करना सितम
अल्लाह की कसम मेरे मौला की कसम
दिल ना दुखाना, माँ को ना सताना, माँ के चूम लेना कदम (x2)
लुत्फ जन्नत का उठाने मे मज़ा आता है
और माँ तेरे पाओ दबाने मे मज़ा आता है
कुछ लोग अपने माँ बाप को झूले मे बीठा कर खाना खिलाते है
कुछ लोग औरत की खातिर माँ बाप को घर से बाहर सुलाते है
माँ बाप के जो दिल को तोड़ देगा
साथ तेरा खुद भी छोड़े देगा
एहसान अपनी माँ का ना भुलाना
माँ के नाजूक से दिल को ना दुखाना
औलाद के खातिर ज़ुल्म सहेति है
फिर भी मुंह से ना कुछ कहती है
किस किस्से मांग कर तुझे खिलाया
फिर भी पगले तुझे ना प्यार आया
माँ जो गुज़र गई तो फिर तू पछताएगा
माँ जो चली गई तो फिर तू पछताएगा
माँ ना रही जहां मे फिर तूह घबराएगा
बेवा हो, सुहागन, तवायफ या भीकारन
माँ का सदा रखना भ्रम
अल्लाह की कसम मेरे मौला की कसम
दिल ना दुखाना, माँ को ना सताना, माँ के चूम लेना कदम (x2)
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यह माँ की ममता, उसके द्वारा किए गए अनगिनत त्याग और संतान पर उसके ऋण को दर्शाने वाला एक अत्यंत भावुक और मर्मस्पर्शी कलाम है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता और विशेषकर माँ की दुआओं को अपने जीवन का सबसे बड़ा सहारा (ताज) मानता है, ईश्वर हर मोड़ पर उसका सम्मान सुरक्षित रखता है। कवि एक धर्मसंकट को भी बयां करता है कि जब माँ बीमार हो और नमाज़ का समय भी हो, तो संतान दुविधा में पड़ जाती है क्योंकि माँ की सेवा करना और ईश्वर की इबादत करना दोनों ही अनिवार्य कर्तव्य (फ़र्ज़) हैं।
| शब्द | अर्थ (Hindi) |
|---|---|
| लाज | सम्मान / प्रतिष्ठा |
| आज़ीम (अज़ीम) | महान / सबसे उच्च |
| हश्र | प्रलय का दिन / न्याय का दिन (क़यामत) |
| ज़मानत | सुरक्षा की गारंटी / ज़िम्मेदारी |
| लुत्फ़ | आनंद / मज़ा |
| भ्रम (भ्रम/भर्म) | मान-सम्मान / गरिमा |
इस कलाम में बताया गया है कि माँ ने हमें पालने के लिए खुद रात-रात भर जागकर कष्ट सहे और अपनी खुशियाँ न्योछावर कर दीं, इसलिए उसके चरणों के नीचे ही जन्नत है। कवि उन लोगों को चेतावनी देता है जो पत्नी या दुनिया के स्वार्थ में आकर बूढ़े माता-पिता को घर से बाहर कर देते हैं, क्योंकि उनका दिल दुखाने वाले का साथ स्वयं ईश्वर भी छोड़ देता है। माँ चाहे किसी भी हाल में हो—विधवा हो या निर्धन—संतान का यह परम कर्तव्य है कि वह जीते जी उसकी सेवा करे, क्योंकि उसके जाने के बाद केवल जीवनभर का पछतावा ही हाथ रहता है।
शायर के अनुसार, जब एक तरफ नमाज़ का वक़्त हो और दूसरी तरफ बीमार माँ हो, तो वह एक वक़्त में किन दो 'फ़र्ज़' को अदा करने की कशमकश (उलझन) में है?