मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है
- 1 महीना पहले fiber_manual_record 105 बार देखा गया
टाइटल : Chahte Aap To Khud Daud Ke Aata Pani
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : ज़ैनुल आबिदीन कानपुरी
नातख्वान/कलाकार: ज़ैनुल आबिदीन कानपुरी
जोड़ा गया : 15 Jul, 2024 10:10 AM IST
बार देखा गया : 705
Time to read: 2 min read
translate बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:
चाहते आप तो ख़ुद दौड़ के आता पानी,
या हुसैन आप की ठोकर से निकलता पानी
क्या थी औक़ात पिला देता जो दरिया पानी,
मेरे अब्बास ने दरिया को पिलाया पानी
सब्र तो देखिए सरकार के घर वालों का,
एक बच्चे ने भी दुश्मन से न मांगा पानी
मान लेता जो याजीद इबन-ए-अली की अजमत,
फिर तो खुद भरता वो शब्बीर के घर का पानी
एड़ियाँ अपनी ज़मीं पर जो रगड़ते असग़र,
कर्बला तेरे सँभाले न सँभलता पानी
चाहते आप तो ख़ुद दौड़ के आता पानी,
या हुसैन ! आप की ठोकर से निकलता पानी
आसमाँ गर तुझे शब्बीर इशारा करते,
दिल ये कहता है कि दिन-रात बरसता पानी
या अली शेर-ए-ख़ुदा ! आप के बेटे शब्बीर,
हुक्म दे देते तो सूरज भी उगलता पानी
या हुसैन आप की ठोकर से निकलता पानी,
या हुसैन आप की ठोकर से निकलता पानी
इतने तर-दस्त थे अब्बास के दोनों बाज़ू,
पड़ गया जिस के भी उस ने ना माँगा पानी
तुझ पे सौ जान है क़ुर्बान मेरी, ऐ असग़र,
तेरी हिम्मत ने यज़ीदों को पिलाया पानी
कौन कहता है कि पानी के थे प्यासे शब्बीर
सच तो ये है कि था शब्बीर का प्यासा पानी
चाहते आप तो ख़ुद दौड़ के आता पानी,
या हुसैन आप की ठोकर से निकलता पानी