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Bimar Zindagi Hai Dawa Mang Rahi Hai Lyrics In हिन्दी

(Bimar Zindagi Hai Dawa Mang Rahi Hai, Yeh Rooh Madine Ki Hawa Mang Rahi Hai)


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टाइटल : Bimar Zindagi Hai Dawa Mang Rahi Hai

श्रेणी (कटेगरी) : हम्द के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : कलामे आलाहज़रत (इमाम अहमद रज़ा)

नातख्वान/कलाकार: अशफाक नूरी

जोड़ा गया : 24 Sep, 2022 01:30 PM IST

बार देखा गया : 5.7K बार डाउनलोड हुआ : 250

Time to read: 1 min read

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Bimar Zindagi Hai Dawa Mang Rahi Hai,
Bimar Zindagi Hai Dawa Mang Rahi Hai

Bimar Zindagi Hai Dawa Mang Rahi Hai,
Yeh Rooh Madine Ki Hawa Mang Rahi Hai,
Yeh Rooh Madine Ki Hawa Mang Rahi Hai

Aye Malike Kaunen Badi Raat Ata Kar,
Aye Malike Kaunen Badi Raat Ata Kar,
Yeh Fatima Ro Roke Duwa Mang Rahi Hai,
Yeh Fatima Ro Roke Duwa Mang Rahi Hai

Yeh Rooh Madine Ki Hawa Mang Rahi Hai

Mumkin Nahi Naseeb Hamara Sakista Ho,
Mumkin Nahi Naseeb Hamara Sakista Ho,
Maa Mere Liye Ghar Me Duaa Mang Rahi,
Maa Mere Liye Ghar Me Duaa Mang Rahi

Yeh Rooh Madine Ki Hawa Mang Rahi Hai

Bimar Zindagi Hai Dawa Mang Rahi Hai
Yeh Rooh Madine Ki Hawa Mang Rahi Hai

Bimar Zindagi Hai Dawa Mang Rahi Hai
Yeh Rooh Madine Ki Hawa Mang Rahi Hai

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह भावपूर्ण और दर्द भरी नात शरीफ़ इंसानी रूह की व्याकुलता, मदीना शरीफ़ की चाहत, माँ की दुआओं का चमत्कार और सैयदा फ़ातिमा ज़हरा (र.अ.) की पावन निस्बत का बहुत ही सुंदर और रूहानी वर्णन है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि दुनिया के दुखों और परेशानियों से थकी हुई यह बीमार ज़िंदगी सुकून की दवा ढूँढ रही है, जिसे केवल मदीना शरीफ़ की पवित्र हवा ही ठीक कर सकती है। कवि पूरे विश्वास के साथ कहता है कि मेरा भाग्य (नसीब) कभी टूट या बिखर (शिकस्ता) नहीं सकता, क्योंकि मेरी माँ घर पर बैठकर मेरे सुख-चैन के लिए रब से लगातार दुआएँ माँग रही है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
मालिक-ए-कौनेनदोनों जहानों का स्वामी (ईश्वर/अल्लाह)
बड़ी रातशब-ए-क़द्र (वह महान और बरकत वाली रात जिसमें क़ुरआन उतरा)
सकिस्ता (शिकस्ता)टूटा हुआ / बर्बाद या नाकाम
नसीबभाग्य / मुक़द्दर
रूहआत्मा / प्राण

सारांश (Summary)

कवि कहता है कि सांसारिक कष्टों का एकमात्र उपचार मदीना की रूहानी फ़िज़ा में है। इस कलाम में सैयदा फ़ातिमा (र.अ.) के रो-रोकर दुआ माँगने का ज़िक्र करके ईश्वर से एक महान रात (बड़ी रात) अता करने की इल्तेजा की गई है। इस नात का सबसे ख़ूबसूरत संदेश यह है कि माँ की दुआ संतान के लिए हर प्रकार की बदक़िस्मती और नाकामी के ख़िलाफ़ एक अटूट और मज़बूत ढाल बन जाती है।

शायर के अनुसार, किसके घर में दुआ माँगने की वजह से उसका नसीब कभी भी शिकस्ता (टूटा हुआ) नहीं हो सकता?

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