मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है
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टाइटल : Bagiya Ma Koyaliya Bhore Bhore
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी
नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी
जोड़ा गया : 09 Jun, 2024 10:07 AM IST
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बगिया मा कोयलिया भोरे भोरे,
मस्ती में पुकारे नबी नबी
सूरज बोले एक हम ही नहीं,
पढ़े चाँद सितारे नबी नबी
धरती पे नबी जी आवत है,
काबे को फ़रिश्ते सजावत है,
सब हूरों मलक झूमें गायें,
आमीना के दुवारे नबी नबी
पैगाम-ऐ-इलाही सुनावत है,
कलमें की बसूरियाँ बजवात है,
यही कह के बूत गिरे मुंह के बल,
देखो आई गये प्यारे नबी नबी
कमज़ोर थी उठनी पीछे थी,
जब चले आक़ा तो आगे थे,
लेके नूरी सवारी थर थर भागे,
है पुस्त पे प्यारे नबी नबी
बगिया मा कोयलिया भोरे भोरे,
मस्ती में पुकारे नबी नबी