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बगिया में कोयलिया भोरे भोरे Lyrics In हिन्दी

(बगिया में कोयलिया भोरे भोरे, मस्ती में पुकारे नबी नबी)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : बगिया में कोयलिया भोरे भोरे

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी

नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी

जोड़ा गया : 09 Jun, 2024 10:08 AM IST

बार देखा गया : 1.2K

Time to read: 1 min read

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बगिया में कोयलिया भोरे भोरे,
मस्ती में पुकारे नबी नबी

सूरज बोले एक हम ही नहीं,
पढ़े चाँद सितारे नबी नबी

धरती पे नबी जी आवत हैं,
काबे को फ़रिश्ते सजावत हैं,
सब हूरो–मलअक झूमें गाएँ,
आमीना के दुवारे नबी नबी

पैग़ाम–ए–इलाही सुनावत हैं,
कलमे की बसूरियाँ बजावत हैं,
यही कहके बुत गिरें मुँह के बल,
देखो! आए गाए प्यारे नबी नबी

कमज़ोर थी उठनी पीछे थी,
जब चले आका तो आगे थे,
लेके नूरी सवारी थर थर भागे,
है पुश्त पे प्यारे नबी नबी

बगिया में कोयलिया भोरे भोरे,
मस्ती में पुकारे नबी नबी

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह मधुर नात हुज़ूर ﷺ की विलादत (जन्म) के अवसर पर प्रकृति और पूरी कायनात में छाई खुशी को बहुत ही सरल और भोजपुरी भाषा के मिठास के साथ बयां करता है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इस नात में शायर कहता है कि बाग की कोयल से लेकर सूरज, चाँद और सितारों तक, हर कोई नबी ﷺ के नाम का विर्द कर रहा है। जब आप ﷺ इस धरती पर तशरीफ़ लाए, तो फ़रिश्तों ने काबे को सजाया और हज़रत आमीना के दरवाज़े पर हूरों और फ़रिश्तों ने झूमकर खुशियाँ मनाईं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
भोरे भोरेसवेरे-सवेरे (भोर में)
आवत हैंआ रहे हैं
मलअकफ़रिश्ते
दुवारेद्वार या चौखट
बुतमूर्तियाँ
उठनीऊँटनी
पुश्तपीठ

सारांश (Summary)

इस नात का सार यह है कि पैग़म्बर मोहम्मद ﷺ का आगमन पूरी सृष्टि के लिए उत्सव का क्षण था। उनके आने से न केवल इंसान, बल्कि पशु-पक्षी और निर्जीव वस्तुएँ भी निहाल हो गईं; यहाँ तक कि उनके स्पर्श मात्र से कमज़ोर ऊँटनी में भी अद्भुत स्फूर्ति आ गई और बुराई के प्रतीक बुत मुँह के बल गिर पड़े।

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