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अंधेरी रात है ग़म की घटा असियाँ की काली है Lyrics In हिन्दी

(अंधेरी रात है ग़म की घटा असियाँ की काली है, दिल-ए-बेकस का इस आफ़त में आक़ा तू ही वाली है)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : अंधेरी रात है ग़म की घटा असियाँ की काली है

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 15 Apr, 2026 04:05 PM IST

बार देखा गया : 150

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

अंधेरी रात है ग़म की घटा, असियाँ की काली है
दिल-ए-बेकस का इस आफ़त में आक़ा तू ही वाली है

न हो मायूस आती है सदा गोर-ए-ग़रीबां से
नबी उम्मत का हामी है ख़ुदा बंदों का वाली है

उतरते चाँद ढलती चाँदनी जो हो सके कर ले
अँधेरा पाख आता है ये दो दिन की उजाली है

अरे ये भेड़ियों का बन है और शाम आ गई सर पर
कहाँ सोया मुसाफ़िर हाय कितना ला-उबाली है

अँधेरा घर, अकेली जान, दम घुटता, दिल उकताता
ख़ुदा को याद कर प्यारे वो सा'अत आने वाली है

ज़मीन तपती, कतेली राह, भारी बोझ, घायल पाँव
मुसीबत झेलने वाले तेरा अल्लाह वाली है

न चौंका दिन है ढलने पर तेरी मंज़िल हुई खोटी
अरे ओ जाने वाले नींद ये कब की निकाली है

रज़ा मंज़िल तो जैसी है वो इक मैं क्या सभी को है
तुम इस को रोते हो ये तो कहो याँ हाथ खाली है

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह सुप्रसिद्ध कलाम इमाम अहमद रज़ा खान द्वारा रचित है, जो इंसान को दुनिया की मोह-माया छोड़ कर आखिरत (परलोक) की तैयारी करने की प्रेरणा देता है।

व्याख्या और सारांश (Explanation & Summary)

यह पंक्तियाँ जीवन की क्षणभंगुरता और मृत्यु के पश्चात की कठिन यात्रा का वर्णन करती हैं। कवि चेतावनी देते हैं कि यह दुनिया दो दिन की चांदनी की तरह है, इसलिए गफ़लत की नींद त्याग कर नेक काम कर लो, क्योंकि अंत में केवल अल्लाह की रहमत और रसूल अल्लाह (ﷺ) की शफ़ाअत ही बेसहारा रूह का सहारा बनेगी।


कठिन शब्दों के अर्थ (Hard Words Meanings)

शब्दअर्थ
असियाँ (Asiyan)पाप / गुनाह (Sins)
दिल-ए-बेकसअसहाय या मजबूर दिल
वाली (Wali)रक्षक / संरक्षक / मालिक
गोर-ए-ग़रीबांपरदेसियों या निर्धनों की कब्र
हामी (Hami)पक्ष लेने वाला / मददगार
ला-उबालीबेफ़िक्र / लापरवाह (Careless)
सा'अत (Sa'at)घड़ी या निश्चित समय
खोटी (Khoti)दोषपूर्ण या कठिन (मुश्किल मंज़िल)
पाख (Paakh)पखवाड़ा / समय का हिस्सा (यहाँ अंधेरे का प्रतीक)

विशेष नोट: इस कलाम का अंतिम शेर (मक्ता) आत्म-मंथन की सीख देता है कि मंज़िल तो सबकी कठिन है, पर रोना इस बात का है कि हमारे हाथ नेक आमाल (अच्छे कर्मों) से खाली हैं।

शायर ने "भेड़ियों का बन" कहकर दुनिया की किस तरह की खतरनाक सूरत-ए-हाल (स्थिति) की तरफ इशारा किया है?

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