मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 25 Apr, 2026 10:09 AM IST
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मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है,
मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है
वो जो आए हैं उनसे रोशन हर एक मकान है,
चमन में महकती है जिन की ख़ुशबू,
मोहब्बत की राहों में वही तो जुगनू,
उजाले ही उजाले अब तो हर एक तरफ,
गुलज़ार-ए-मिल्लत का हर एक काम महान है
मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है,
मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है
नबी के नक्श-ए-क़दम पर वो चलते हैं,
वो हक़ के लिए हरदम ही जलते हैं,
नहीं कोई उनसे बड़ा इस ज़माने में,
मेरे सरकार का अंदाज़-ए-बयाँ महान है
मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है,
मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है
उन्हें दिल से अब तो प्यार करते हैं,
हम तो सरकार पर ही दम भरते हैं,
गुलज़ार-ए-मिल्लत की शान है निराली,
वो तो मेरे सरकार का ही तो मान है
मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है,
मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है
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ये नबी ﷺ की सुन्नत पर चलने वाले एक सच्चे रहनुमा की अज़मत का बयान है, जिसमें बताया गया है कि उनकी शख्सियत से दीन की राहें रोशन हैं और उनका हर अमल नबी ﷺ के बताए हुए रास्ते की गवाही देता है।
इन लिरिक्स का मतलब है कि गुलज़ार-ए-मिल्लत की आमद से ज़माने में हिदायत का उजाला फैला है और उनके किरदार की खुशबू से मोहब्बत की राहें महक रही हैं। शायर कहता है कि उनकी महानता का राज यह है कि वे हमेशा हक और सच के लिए खड़े रहते हैं और उनकी गुफ्तगू का अंदाज़ लोगों के दिलों को जीतने वाला है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning (Hindi/English)) |
|---|---|
| गुलज़ार-ए-मिल्लत | कौम का चमन (Title of a spiritual leader) |
| नक्श-ए-क़दम | पदचिन्ह (Footsteps) |
| हक़ | सच/सत्य (Truth) |
| अंदाज़-ए-बयाँ | बात करने का तरीका (Way of expression) |
| दम भरना | भरोसा या अक़ीदत रखना (To have deep faith) |
| मान | सम्मान/गर्व (Pride/Honor) |
इस कलाम का सार यह है कि एक मोमिन की असली पहचान उसके किरदार और नबी ﷺ की पैरवी से होती है। गुलज़ार-ए-मिल्लत की ज़ात को एक ऐसी मशाल बताया गया है जो हक़ की खातिर जलती है और अपनी मीठी बातों (अंदाज़-ए-बयाँ) से समाज में नबी के दीन को आम कर रही है।
लिरिक्स के मुताबिक, गुलज़ार-ए-मिल्लत किसके पदचिन्हों पर चलते हैं और उनका कौन सा अंदाज़ महान बताया गया है?