मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Mustafa Aap Ke Jaisa Koi Aaya Hi Nahi
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी
नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी
जोड़ा गया : 20 Feb, 2023 11:06 AM IST
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मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
आता भी कैसे ! जब अल्लाह ने बनाया ही नहीं !
कोई सानी ना है रब का, ना मेरे आक़ा का
एक का जिस्म नहीं, एक का साया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
कोई सानी ना है रब का, ना मेरे आक़ा का
एक का जिस्म नहीं, एक का साया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
क़ब्र में जब कहा सरकार ने, ये मेरा है
फिर फ़रिश्तों ने मुझे हाथ लगाया ही नहीं
ज़ुल्फ़ वल्लैल है, रुख़ वद्दुहा, मा-ज़ाग़ आँखें
इस तरह रब ने किसी को भी सजाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
लौट कर आगया मक्के से, मदीना ना गया
कैसे जाता ! तुझे आक़ा ने बुलाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
लौट कर आगया मक्के से, मदीना ना गया
कैसे जाता ! तुझे आक़ा ने बुलाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
जब से दरवाज़े पे लिखा हूँ मैं आला हज़रत
कोई गुस्ताख़-ए-नबी घर मेरे आया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
आप ने जब से नवाज़ा है, या रसूलल्लाह !
मैंने दामन किसी चौखट पे बिछाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
जिस ने सरकार के चेहरे की ज़ियारत की है
उस की नज़रों में कोई और समाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
जब तलक पुश्त पे शब्बीर रहे, ऐ फ़ैज़ी !
सर को सज्दे से पयम्बर ने उठाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
आता भी कैसे ! जब अल्लाह ने बनाया ही नहीं !