मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
- 1 دن پہلے fiber_manual_record 68 بار دیکھا گیا
,
عنوان: Mustafa Aap Ke Jaisa Koi Aaya Hi Nahi
زمرہ: نعت کے بول (لیرکس)
مصنف/گیتکار: شمیم رضا فیضی
نعت خوان/ فنکار: شمیم رضا فیضی
شامل کیا گیا: 20 Feb, 2023 11:06 AM IST
دیکھا گیا: 3.7K ڈاؤن لوڈز: 204
Time to read: 2 min read
translate بول کی زبان منتخب کریں:
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
आता भी कैसे ! जब अल्लाह ने बनाया ही नहीं !
कोई सानी ना है रब का, ना मेरे आक़ा का
एक का जिस्म नहीं, एक का साया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
कोई सानी ना है रब का, ना मेरे आक़ा का
एक का जिस्म नहीं, एक का साया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
क़ब्र में जब कहा सरकार ने, ये मेरा है
फिर फ़रिश्तों ने मुझे हाथ लगाया ही नहीं
ज़ुल्फ़ वल्लैल है, रुख़ वद्दुहा, मा-ज़ाग़ आँखें
इस तरह रब ने किसी को भी सजाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
लौट कर आगया मक्के से, मदीना ना गया
कैसे जाता ! तुझे आक़ा ने बुलाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
लौट कर आगया मक्के से, मदीना ना गया
कैसे जाता ! तुझे आक़ा ने बुलाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
जब से दरवाज़े पे लिखा हूँ मैं आला हज़रत
कोई गुस्ताख़-ए-नबी घर मेरे आया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
आप ने जब से नवाज़ा है, या रसूलल्लाह !
मैंने दामन किसी चौखट पे बिछाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
जिस ने सरकार के चेहरे की ज़ियारत की है
उस की नज़रों में कोई और समाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
जब तलक पुश्त पे शब्बीर रहे, ऐ फ़ैज़ी !
सर को सज्दे से पयम्बर ने उठाया ही नहीं
मुस्तफ़ा ! आप के जैसा कोई आया ही नहीं !
आता भी कैसे ! जब अल्लाह ने बनाया ही नहीं !