मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : हैदर का घराना करबल में क्या ज़ुल्म अनोखे सहेता है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 23 Mar, 2023 05:56 AM IST
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हैदर का घराना करबल में क्या ज़ुल्म अनोखे सहेता है,
प्यासे है मोहम्मद के प्यारे,
और सामने दरिया बहेता है
हैदर का घराना करबल में क्या ज़ुल्म अनोखे सहेता है
दिल डूब गया है बानो का,
और खून का दरिया बहेता है,
जिस झूले में असगर सोते थे,
दो दिन से वो खाली रहेता है
हैदर का घराना करबल में क्या ज़ुल्म अनोखे सहेता है
ज़ैनब की नज़र है चौखट पर,
और कान लगे है आहट पर,
जब कोई दुलारा बाहर हो,
तो माँ को खटका रहेता है
हैदर का घराना करबल में क्या ज़ुल्म अनोखे सहेता है
ऐ कूफीयों क्या पाया तुमने,
उन पर ही सितम ढाया तुमने,
जिस घर का हर एक बच्चा बच्चा,
सरकार से निस्बत रखता है
हैदर का घराना करबल में क्या ज़ुल्म अनोखे सहेता है
ऐ शिमरे लायीं ज़ालिम तूने,
प्यास ही गला काटा तूने,
बह जाते है आँखों से आँसू,
वो मंज़र सामने आता है
हैदर का घराना करबल में क्या ज़ुल्म अनोखे सहेता है
सज्जाद शहीदों का गम है,
जितना ही लिखो उतना काम है,
हर साल मुहर्रम में घर घर,
शब्बीर का चर्चा होता है
हैदर का घराना करबल में क्या ज़ुल्म अनोखे सहेता है
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यह कर्बला के दर्दनाक वाक़िये पर आधारित एक अत्यंत भावुक और शोकपूर्ण मर्सिया (नौहा) है। इसमें कर्बला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन और उनके पवित्र परिवार (अहल-ए-बेत) पर ढाए गए अत्याचारों, उनकी अत्यधिक प्यास और उनकी महान शहादत का सजीव चित्रण किया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि कर्बला के तपते मैदान में हज़रत अली का परिवार (हैदर का घराना) ऐसे अद्वितीय अत्याचार सह रहा है, जहाँ पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ के नवासे और उनके बच्चे तीन दिनों से प्यासे हैं और ठीक उनके सामने फ़ुरात नदी का पानी बह रहा है। ६ महीने के मासूम बच्चे अली असग़र का झूला दो दिन से खाली पड़ा है और ज़ालिम शिम्र ने इमाम हुसैन का प्यासा गला काट दिया, जिसके कारण माँ बानो और बीवी ज़ैनब का दिल गहरे दुख में डूबा हुआ है।
| शब्द | हिंदी अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| हैदर / शब्बीर | शेर (हज़रत अली का लक़ब) / इमाम हुसैन का दूसरा पवित्र नाम |
| करबल | कर्बला का मैदान (इराक में स्थित ऐतिहासिक स्थान) |
| दरिया | नदी (यहाँ तात्पर्य 'फ़ुरात' नदी से है) |
| खटका | डर / चिंता या अंदेशा |
| निस्बत | संबंध / गहरा नाता या जुड़ाव |
| शिमरे लायीं | शिम्र मल'ऊन (इमाम हुसैन को शहीद करने वाला क्रूर हत्यारा) |
| सज्जाद | इमाम हुसैन के सुपुत्र 'इमाम ज़ैनुल आबेदीन' (मर्सिया लिखने वाले का संदर्भ) |
इस नौहे का मूल सार यह है कि कूफ़ा के ज़ालिमों ने उस पाक घराने पर ज़ुल्म ढाया, जिसका बच्चा-बच्चा हुज़ूर ﷺ के ख़ानदान से ताल्लुक (निस्बत) रखता था। मासूम बच्चों से लेकर बड़ों तक सबका पानी बंद कर दिया गया और उन्हें बेदर्दी से शहीद किया गया। शायर कहता है कि शहीदों का यह ग़म इतना असीम है कि इसे शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं किया जा सकता, यही कारण है कि सदियाँ बीत जाने के बाद भी हर साल मुहर्रम के महीने में घर-घर इमाम हुसैन (शब्बीर) की अमर शहादत का ज़िक्र और मातम होता है।
लिरिक्स के मुताबिक, किस मासूम बच्चे का झूला दो दिन से खाली है और उनके परिवार का नबी ﷺ से क्या ताल्लुक (निस्बत) है?