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दम ए इज़्तिराब मुझको जो खयाल ए यार आये Lyrics In हिन्दी

(दम-ए-इज़्तिराब मुझको जो खयाल-ए-यार आये, मेरे दिल में चैन आये, तो इसे क़रार आये)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : दम-ए-इज़्तिराब मुझको जो खयाल-ए-यार आये

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 07 Aug, 2023 09:17 AM IST

बार देखा गया : 826

Time to read: 3 min read

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दम-ए-इज़्तिराब मुझको जो खयाल-ए-यार आये,
मेरे दिल में चैन आये, तो इसे क़रार आये

तेरी वहशतों से ऐ दिल, मुझे क्यों न आर आये,
तू उन्हीं से दूर भागे, जिन्हें तुझ पे प्यार आये

दम-ए-इज़्तिराब मुझको जो खयाल-ए-यार आये,
मेरे दिल में चैन आये, तो इसे क़रार आये

ना हबीब से मुहिब का कहीं ऐसा प्यार देखा,
वो बने खुदा का प्यारा, तुम्हें जिस पे प्यार आये

मुझे क्या हो ग़म-ए-आलम का, मुझे क्या हो ग़म-ए-आलम का,
कि इलाज़-ए-ग़म-ए-आलम का, मेरे ग़मगुसार आये

जो चमन बनाये बन को, जो ज़िना करे चमन को,
मेरे बाग़ में इलाही, कभी वो बहार आये

सबब-ए-ग़फूर-ए-रहमत मेरी बेज़ुबानियाँ हैं,
ना फुग़ाँ के ढंग जानूँ, ना मुझे पुकार आये

तेरी रहमतों से कम है, मेरे जुर्म इस से ज़ायद,
ना मुझे हिसाब आये, ना मुझे शुमार आये

तेरे सदके जाये शाहा, ये तेरा ज़लील मंगता,
वो वक़ार ले के जाये, जो ज़लील-ओ-ख़्वार आये

वो करीम हैं ये सरवर, कि लिखा हुआ है दर पर,
कि जिसे लेने हों दो आलम, वो उमीदवार आये

तेरे दर के हैं भिखारी, मिले खैर दम-ब-दम की,
तेरा नाम सुन के दाता, हम उमीदवार आये

गुल-ए-क़ुल्द ले के ज़ाहिद, तुझे क़ार-ए-तैबा दे दूँ,
मेरे फूल मुझ को दीजे, बड़े होशियार आये

मेरे दिल को दर्द-ए-उल्फ़त-ओ-सुकून दे इलाही,
मेरी बे-क़रारियों को ना कभी क़रार आये

हसन उनका नाम ले कर, तू पुकार देख ग़म में,
कि वो नहीं जो ग़ाफ़िल, पस-ए-इंतज़ार आये

तेरी वहशतों से ऐ दिल, मुझे क्यों न आर आये,
तू उन्हीं से दूर भागे, जिन्हें तुझ पे प्यार आये

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह रूहानियत और तड़प से भरपूर नात-ए-पाक मौलाना हसन रज़ा ख़ान हसनؔ बरेलवी द्वारा रचित है, जिसमें आक़ा ﷺ के दर की सख़ावत, उनकी रहमत पर अटूट विश्वास और उनके इश्क़ की बेचैनी का वर्णन है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इस कलाम का अर्थ है कि जब भी एक आशिक़ का दिल घबराहट और बेचैनी (दम-ए-इज़्तिराब) से तड़पता है, तो अपने महबूब (हुज़ूर ﷺ) का ख़याल आते ही उसके दिल को असीम सुकून मिल जाता है। शायर अपने ही दिल को डांटते हुए कहता है कि तुझे उन रहमत वाले नबी ﷺ से दूर भागते हुए शर्म (आर) क्यों नहीं आती, जो तुझसे (अपनी उम्मत से) सबसे ज़्यादा मोहब्बत करते हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Hindi / English Meaning)
दम-ए-इज़्तिराबबेचैनी या व्याकुलता का पल (Moment of restlessness)
ख़याल-ए-यारमहबूब का ख़याल — यहाँ मुराद हुज़ूर ﷺ से है (Thought of the beloved)
वहशतोंपागलपन, भटकाव या दीवानापन (Wilderness / Madness)
आरशर्म, लज्जा या झिझक (Shame / Disgrace)
ग़मगुसारदुःख-दर्द बांटने वाला या हमदर्द (Sympathizer)
वक़ारइज़्ज़त, सम्मान या गौरव (Dignity / Honour)
ज़लील-ओ-ख़्वारलाचार, बेबस या समाज का ठुकराया हुआ (Humiliated / Helpless)
ग़ाफ़िललापरवाह या अनजान (Negligent / Unaware)

सारांश (Summary)

इस नात का सार यह है कि मदीने वाले आक़ा ﷺ का दरबार वह दयालु (करीम) दर है जहाँ दोनों जहान की नेमते बंटती हैं और वहाँ आने वाला हर बेबस भिखारी सम्मान (वक़ार) पाकर लौटता है। शायर 'हसन' फ़रमाते हैं कि हमारे गुनाह चाहे जितने भी हों, वे हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत और अल्लाह की रहमत से बड़े नहीं हो सकते, इसलिए ग़म के वक़्त सिर्फ़ उनका नाम लेकर पुकारना चाहिए क्योंकि वह अपनी उम्मत की पुकार सुनने में कभी देर नहीं करते।

इस नात के मुताबिक, जब कोई ज़लील-ओ-ख़्वार (बेबस और लाचार) मंगता सरकार ﷺ के दर पर आता है, तो वह वहाँ से क्या लेकर लौटता है?

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