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बाज़ार में दाखिल होते वक्त की दुआ

(Dua When Entering the Market (Bazaar))


Bazaar Mein Dakhil Hote Waqt Ki Dua हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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बाज़ार में दाखिल होते वक्त की दुआ

Updated :03 May, 2026 04:06 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन परिवार और घर यात्रा

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لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰہُ وَحْدَهٗ لَا شَرِيكَ لَهٗ ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ حَيٌّ لَا يَمُوتُ بِيَدِهِ الْخَيْرُ وَهُوَ عَلٰی كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٍ

बाज़ार में दाखिल होते वक्त की दुआ

बाज़ार में दाखिल होते वक्त की दुआ

अर्थ:

अल्लाह अज़्ज़वजल के सिवा कोई माबूद नहीं, वह एक है, उसका कोई शरीक नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हम्द है। वही ज़िंदा करता और मारता है। वह (ऐसा) ज़िंदा है जिसे मौत नहीं। तमाम भलाईयाँ उसी के क़ब्ज़ा-ए-क़ुदरत में हैं और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।

अंग्रेजी में मतलब:

There is no deity except Allah Azzawajal he is unique, He has no partner, His is the kingship, and for him is praise, he brings to lie and he kills, He is alive(as such death will not come to him. All virtues are in his hand of power, He can do what ever he wants.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

बाज़ार एक ऐसी जगह है जहाँ इंसान दुनिया की चकाचौंध, खरीद-फरोख्त और मुनाफे के चक्कर में अक्सर अपने पैदा करने वाले को भूल जाता है। ऐसे माहौल में इस दुआ को पढ़ना इंसान के ईमान को ताज़ा करता है। यह दुआ हमें याद दिलाती है कि असली मालिक और बादशाह केवल अल्लाह है, और वही जीवन और मृत्यु देने वाला है। जब सब लोग दुनिया की चीज़ों को पाने की दौड़ में होते हैं, तब एक मोमिन (आस्तिक) अल्लाह की बड़ाई बयान करके अपनी रूह को गफ़लत (लापरवाही) से बचाता है।

क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

यह दुआ एक मशहूर हदीस में मौजूद है जो जामिअत तिर्मिज़ी (हदीस 3428) में वर्णित है। हदीस के मुताबिक, जो व्यक्ति बाज़ार में दाखिल होते समय इसे पढ़ता है, अल्लाह उसके खाते में दस लाख नेकियाँ लिख देता है, उसके दस लाख गुनाह माफ़ कर देता है और उसके दस लाख दर्जे बुलंद कर देता है। हालाँकि यह शब्द सीधे कुरान के नहीं हैं, लेकिन इसका सार कुरान की कई आयतों से मिलता है, जैसे सूरह अल-हदीद (आयत 2), जहाँ अल्लाह की बादशाहत और उसके हर चीज़ पर क़ादिर होने का ज़िक्र है।


सारांश (Summary)

बाज़ार की भीड़-भाड़ और शोर में यह दुआ अल्लाह को याद रखने का सबसे बेहतरीन ज़रिया है। यह हमें सिखाती है कि दुनिया के लेन-देन के बीच भी असली ताकत और भलाई अल्लाह के हाथ में है। इस दुआ को पढ़ने के बदले मिलने वाला अज़ीम (बड़ा) सवाब इंसान को दुनिया के साथ-साथ आख़िरत की कामयाबी भी दिलाता है। यह हमारे दिल को लालच से दूर रखकर खुदा की याद से भर देती है।

क्या आपको बाज़ार जाते वक्त अल्लाह का ज़िक्र करने में सुकून मिलता है?

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