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मस्जिद में दाखिल होने की दुआ

(Dua When Entering The Mosque)


मस्जिद में दाखिल होने की दुआ हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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मस्जिद में दाखिल होने की दुआ

Updated :03 May, 2026 04:44 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन

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اَللّٰهُمَّ افْتَحْ لِيْ اَبْوَابَ رَحْمَتِکَ.

मस्जिद में दाखिल होने की दुआ

मस्जिद में दाखिल होने की दुआ

अर्थ:

ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।

अंग्रेजी में मतलब:

Oh Allah! Open the doors for me of your Blessings.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

मस्जिद अल्लाह का घर और इबादत की सबसे मुकद्दस (पवित्र) जगह है। जब एक मोमिन मस्जिद में कदम रखता है, तो वह दुनिया के शोर-शराबे और फिक्रों को पीछे छोड़ देता है। इस दुआ के ज़रिए हम अल्लाह से यह दरख्वास्त करते हैं कि वह हमारे दिल और रूह के लिए अपनी विशेष रहमत (दया) के रास्ते खोल दे। यह दुआ हमें याद दिलाती है कि इबादत करने की तौफीक मिलना भी अल्लाह का एक बड़ा फज़ल है। बिना उसकी रहमत के, हम न तो सुकून पा सकते हैं और न ही हमारी इबादत में वह गहराई आ सकती है जो खुदा को पसंद है।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

यह दुआ सहीह मुस्लिम (हदीस 713) और सुनन अबू दाऊद जैसी हदीस की प्रामाणिक किताबों में दर्ज है। रसूलुल्लाह ﷺ ने सिखाया कि जब तुम में से कोई मस्जिद में दाखिल हो, तो नबी पर दरूद व सलाम भेजे और फिर यह कहे: "अल्लाहुम्मफ़-तह ली अबवाबा रहमतिक"। हालाँकि यह शब्द हदीस से लिए गए हैं, लेकिन कुरान की सूरह फातिर (आयत 2) इस बात की तस्दीक करती है: "अल्लाह लोगों के लिए अपनी रहमत के जो दरवाज़े खोल दे, उसे कोई रोक नहीं सकता।"


सारांश (Summary)

मस्जिद में प्रवेश करते समय यह दुआ पढ़ना खुदा की रहमत हासिल करने की पहली सीढ़ी है। यह हमारे अंदर विनम्रता पैदा करती है और हमें इबादत के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है। इस छोटी सी दुआ के ज़रिए हम दुनियावी बोझ उतारकर रूहानी सुकून की तलाश में अल्लाह की पनाह में आ जाते हैं। यह मस्जिद के अदब और उसकी पाकीज़गी का एक अहम हिस्सा है।

क्या आपने कभी मस्जिद में दाखिल होते वक्त इस दुआ से मिलने वाले सुकून को महसूस किया है?

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