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तौबा और इस्तिग़फ़ार की दुआ

(Prayer For Forgiveness / Supplication Of Repentance And Seeking Forgiveness)


तौबा और इस्तिग़फ़ार की दुआ हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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तौबा और इस्तिग़फ़ार की दुआ

Updated :08 May, 2026 03:22 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन

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أسْتَغْفِرُ اللهَ رَبي مِنْ كُلِ ذَنبٍ وَأتُوبُ إلَيهِ

तौबा और इस्तिग़फ़ार की दुआ

तौबा और इस्तिग़फ़ार की दुआ

अर्थ:

मैं अल्लाह से अपने गुनाहों की बख्शिश मांगता हूँ, जो मेरा रब है, और उसी की तरफ रुजू करता हूँ।

अंग्रेजी में मतलब:

I ask forgiveness of my sins from Allah who is my Lord and I turn towards Him.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

तौबा और इस्तिग़फ़ार की यह दुआ इंसान की रूहानी पाकीज़गी का एक जरिया है। इसका अर्थ केवल अपनी गलतियों पर शर्मिंदा होना ही नहीं, बल्कि अपने रब की दया और क्षमा की शरण में आना है। जब एक इंसान "अस्तग़फ़िरुल्लाह" कहता है, तो वह अपनी कमियों को स्वीकार करता है और इस वादे के साथ खुदा की तरफ लौटता है कि वह भविष्य में नेक रास्ते पर चलेगा। यह दुआ इंसान के अहंकार (Ego) को खत्म करती है और दिल में सुकून पैदा करती है। यह हमें सिखाती है कि चाहे गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों, अल्लाह की रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा हमेशा खुला रहता है।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

इस्तिग़फ़ार का ज़िक्र कुरान और हदीस दोनों में बहुत ताकीद के साथ आया है। कुरान की सूरह नूह (आयत 10-12) में अल्लाह फरमाता है कि "अपने रब से माफ़ी मांगो, बेशक वह बड़ा माफ़ करने वाला है।" हदीस के मुताबिक, प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ मासूम होने के बावजूद दिन में 70 से 100 बार इस्तिग़फ़ार किया करते थे (सहीह बुखारी)। यह दुआ सुन्नत का हिस्सा है और हर मुसलमान को अपनी दैनिक प्रार्थनाओं का हिस्सा बनानी चाहिए।


सारांश (Summary)

तौबा और इस्तिग़फ़ार की यह दुआ अल्लाह से माफ़ी माँगने और उसकी तरफ वापस लौटने का एक ईमानदार इकरार है। यह हमारे दिल से गुनाहों के बोझ को हटाकर उसे रूहानी सुकून और नूर से भर देती है। निरंतर इस्तिग़फ़ार करने से न केवल परलोक (Akhirat) सुधरता है, बल्कि दुनियावी परेशानियों और तंगहाली से भी निजात मिलती है। यह इंसान को मायूसी से निकाल कर उम्मीद और बेहतरी की ओर ले जाने वाली एक शक्तिशाली दुआ है।

क्या आपने कभी महसूस किया है कि सच्चे दिल से माफ़ी माँगने के बाद दिल को सुकून मिलता है?

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