search
लॉग इन
Get latest updates On WhatsApp

कामयाबी की दुआ (या सफलता के लिए प्रार्थना)

(Dua For Success)


कामयाबी की दुआ (या सफलता के लिए प्रार्थना) हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

avatar
  • Editors Desk
  • Added1 महीना पहले
  • visibility34बार देखा गया
  • comment0 टिप्पणियाँ
  • thumb_up0 likes
  • shareशेयर
thumbnail-img

कामयाबी की दुआ (या सफलता के लिए प्रार्थना)

Updated :04 May, 2026 05:35 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन परिवार और घर

Also read in

وَمَا تَوْفِيقِي إِلَّا بِاللَّهِ ۚ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْهِ أُنِيبُ

कामयाबी की दुआ (या सफलता के लिए प्रार्थना)

कामयाबी की दुआ (या सफलता के लिए प्रार्थना)

अर्थ:

मेरी कामयाबी सिर्फ़ अल्लाह की मदद से है। मैं उसी पर भरोसा करता हूँ और उसी की ओर लौटता हूँ।

अंग्रेजी में मतलब:

My success is not but through Allah. Upon him I have relied, and to Him I return.

wand_stars
Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

There may be some mistakes in this summary, if you find anything wrong then please let us know.

keyboard_arrow_down

व्याख्या (Explanation)

यह दुआ इंसान के ईमान और भरोसे की गहराई को दर्शाती है। इसका मूल संदेश यह है कि इंसान चाहे कितनी भी योजना बना ले या मेहनत कर ले, अंतिम सफलता केवल अल्लाह की इच्छा और उसकी मदद से ही मुमकिन है। यह हमें सिखाती है कि कामयाबी मिलने पर अहंकार (घमंड) करने के बजाय अल्लाह का शुक्रगुज़ार होना चाहिए, क्योंकि वही ताक़त का असली स्रोत है। "उसी की ओर लौटता हूँ" कहने का अर्थ यह है कि हमारे हर काम का मकसद और अंत अल्लाह की रज़ा होनी चाहिए। यह दुआ दिल को सुकून देती है और मुश्किल वक्त में डटे रहने का हौसला प्रदान करती है।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

जी हाँ, यह एक क़ुरानी आयत (Quranic Verse) है। यह शब्द पवित्र क़ुरान के सूरह हूद (Surah Hud, आयत: 88) से लिए गए हैं। यह दुआ हज़रत शुऐब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी कौम को संबोधित करते हुए मांगी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि सुधार करने की उनकी कोशिशें तभी सफल हो सकती हैं जब अल्लाह का साथ हो। अरबी में यह आयत इस प्रकार है: "वमा तौफ़ीक़ी इल्ला बिल्लाह, अलैहि तवक्कलतु व इलैहि उनीब"


सारांश (Summary)

कामयाबी की यह दुआ हमें पूरी तरह अल्लाह पर निर्भर रहना सिखाती है। यह इस बात का इकरार है कि इंसान की अपनी कोई बिसात नहीं, बल्कि हर उपलब्धि ईश्वरीय कृपा का परिणाम है। इसे पढ़ने से मन में विनम्रता आती है और कठिन कार्यों में अल्लाह की विशेष सहायता प्राप्त होती है। यह विश्वास और सफलता का एक सुंदर संगम है।

क्या आपने कभी मेहनत करने के बाद नतीजा अल्लाह पर छोड़कर सुकून महसूस किया है?

Read more ↓
Was this page helpful?
शेयर:

0 Comments

Leave a Comment

समान मसनून दुआएं देखें