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कब्र पर मिट्टी डालते समय की दुआ

(Supplication (Dua) While Placing Soil On The Grave)


कब्र पर मिट्टी डालते समय की दुआ हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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कब्र पर मिट्टी डालते समय की दुआ

Updated :04 May, 2026 06:00 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन

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مِنۡهَا خَلَقۡنَٰكُمۡ وَفِيهَا نُعِيدُكُمۡ وَمِنۡهَا نُخۡرِجُكُمۡ تَارَةً أُخۡرَىٰ

कब्र पर मिट्टी डालते समय की दुआ

कब्र पर मिट्टी डालते समय की दुआ

अर्थ:

हमने तुम्हें ज़मीन (मिट्टी) से पैदा किया, और उसी में तुम्हें लौटाएँगे, और उसी से तुम्हें फिर दोबारा निकालेंगे।

अंग्रेजी में मतलब:

From the earth We created you, and into it We will return you, and from it We will bring you back again

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

यह दुआ इंसान के अस्तित्व के पूरे चक्र—जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म—का एक संक्षिप्त विवरण है। यह हमें याद दिलाती है कि हमारा शरीर मिट्टी के तत्वों से बना है और मरने के बाद इसे वापस मिट्टी में ही मिल जाना है। कब्र पर मिट्टी डालते समय इन शब्दों को दोहराना जीवित लोगों के लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि यह दुनिया अस्थायी है। इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा "दोबारा निकालेंगे" है, जो 'आख़िरत' (परलोक) और न्याय के दिन पर हमारे विश्वास को पक्का करता है। यह हमें सिखाता है कि मौत अंत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत है जहाँ हमें अपने कर्मों का हिसाब देना होगा।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

यह दुआ सीधे पवित्र क़ुरान से ली गई है। यह सूरह ता-हा (Surah Ta-Ha, आयत: 55) का हिस्सा है। हदीस के अनुसार, सुन्नत तरीका यह है कि जब कब्र पर तीन बार मुट्ठी भर मिट्टी डाली जाए, तो पहली बार में "मिन्हा ख़लक्नाकुम" (हमने तुम्हें इसी से पैदा किया), दूसरी बार में "व फ़ीहा नुईदुक्कुम" (और इसी में तुम्हें लौटाएंगे) और तीसरी बार में "व मिन्हा नुख्रिजुकुम तारतन उख्रा" (और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे) पढ़ा जाए।


सारांश (Summary)

(Hindi) यह दुआ हमें हमारी असलियत और जीवन के अंतिम सत्य से रूबरू कराती है। यह इंसान के अहंकार को खत्म करती है क्योंकि हम मिट्टी से शुरू होकर मिट्टी में ही खत्म होते हैं। यह प्रार्थना हमें कयामत के दिन दोबारा जीवित होने के विश्वास पर अडिग रखती है और जीवन को नेक कामों में बिताने की प्रेरणा देती है।

क्या आपने कभी सोचा है कि मिट्टी की यह दुआ हमें ज़िंदगी की कीमत कैसे समझाती है?

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