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आबे ज़म ज़म पीते वक्त की दुआ

(Dua When Drinking Zam Zam Water)


आबे ज़म ज़म पीते वक्त की दुआ हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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आबे ज़म ज़म पीते वक्त की दुआ

Updated :29 Apr, 2026 01:25 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन खाने और पीने

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اَللّٰهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْماً نَافِعاً وَرِزْقاً وَاسِعاً وَشِفَاءً مِنْ كُلِّ دَاءٍ

आबे ज़म ज़म पीते वक्त की दुआ

आबे ज़म ज़म पीते वक्त की दुआ

अर्थ:

इलाही अज़वजल मैं तुझसे इल्म नाफा का और रिज्क की कुशादगी का और बीमारी से शिफ़ायाबी का सवाल करता हूँ।

अंग्रेजी में मतलब:

Allah Azzawajal I ask you for beneficial knowledge, increase in provision and cure from illness.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

आबे ज़म-ज़म पीना एक इबादत है और यह अल्लाह की तरफ से एक मुकद्दस (पवित्र) तोहफा है। इस दुआ को पढ़ना उस बरकत को हासिल करने का जरिया है। जब हम आबे ज़म-ज़म पीते समय इल्म (ज्ञान), रिज़्क़ (आजीविका) और शिफ़ा (स्वास्थ्य) की दुआ करते हैं, तो हम यह इकरार करते हैं कि हर चीज़ अल्लाह के कब्ज़े में है और वह ही हमें नवाजने वाला है। यह दुआ हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मरवी है, जो ज़म-ज़म पीते समय अक्सर यह पढ़ा करते थे।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

ज़म-ज़म की फज़ीलत (महत्ता) के बारे में कोई सीधे तौर पर कुरानी आयत तो नहीं, लेकिन हदीस में इसकी बहुत अहमियत है। सबसे मशहूर हदीस नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का इरशाद है:

"आबे ज़म-ज़म उसी मकसद के लिए है जिसके लिए इसे पिया जाए।" (सुनन इब्न माजा)

यह हदीस इस बात का ठोस सबूत है कि हम जिस नेक नीयत और उम्मीद के साथ ज़म-ज़म पिएंगे, अल्लाह उसे पूरा करने वाला है।


सारांश (Summary)

आबे ज़म-ज़म को नेक नीयत और दुआ के साथ पीना एक अज़ीम सुन्नत है जो बरकत और रहमत का सबब है। इस दुआ को पढ़ने से हम अल्लाह से इल्म की तौफीक, रिज़्क़ में बरकत और बीमारियों से शिफ़ा की गुज़ारिश करते हैं। यह अमल ज़ाहिर करता है कि हम पूरी तरह अल्लाह की ज़ात पर भरोसा रखते हैं। ज़म-ज़म पीने का यह अमल मात्र प्यास बुझाना नहीं, बल्कि रूहानी तौर पर अल्लाह के करीब होने और अपनी नेक दुआओं को पूरा करने का एक ज़रिया है।

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