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अ’तिकाफ में बैठने की दुआ

(Supplication (du’a) for sitting in I’tikaf / entering I’tikaf)


अ’तिकाफ में बैठने की दुआ हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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अ’तिकाफ में बैठने की दुआ

Updated :08 May, 2026 03:47 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : रमज़ान स्पेशल

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بِسْمِ اللّٰهِ دَخَلْتُ وَعَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَنَوَيْتُ سُنَّةَ الاِعْتِكَافِ

अ’तिकाफ में बैठने की दुआ

अ’तिकाफ में बैठने की दुआ

अर्थ:

अल्लाह के नाम से मैं दाखिल हुआ, उसी पर मैंने भरोसा किया, और मैंने सुन्नत-ए-एतिकाफ की नीयत की।

अंग्रेजी में मतलब:

In the name of Allah, I enter the (mosque) and only upon Him (Allah) do I rely. I am making the Intention of Sunnatul I'tikaf.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

अतिकाफ (Aitikaf) का अर्थ है सब कुछ छोड़कर एक कोने में अल्लाह की इबादत के लिए ठहर जाना। जब कोई व्यक्ति यह दुआ पढ़कर मस्जिद में प्रवेश करता है, तो वह मानसिक रूप से दुनिया के शोर-शराबे और व्यस्तताओं को पीछे छोड़ देता है। इस दुआ के माध्यम से वह स्वीकार करता है कि उसकी इस इबादत का आधार केवल अल्लाह का नाम और उस पर अटूट भरोसा है। 'नीयत' इस अमल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि बिना इरादे के कोई भी धार्मिक कार्य पूरा नहीं माना जाता। यह दुआ इंसान को आध्यात्मिक रूप से तैयार करती है ताकि वह अपना पूरा समय आत्म-चिंतन और खुदा की निकटता प्राप्त करने में बिता सके।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

अतिकाफ का उल्लेख सीधे कुरान में मिलता है। सूरह अल-बक़रह (आयत 187) में अल्लाह फरमाता है, "...और जब तुम मस्जिदों में अ'तिकाफ की हालत में हो, तो अपनी पत्नियों से (शारीरिक) संबंध न बनाओ।" हदीस की बात करें तो सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम के अनुसार, रसूलुल्लाह ﷺ रमजान के आखिरी दस दिनों में नियमित रूप से अ'तिकाफ फरमाया करते थे। नीयत के शब्दों के बारे में हदीस का प्रसिद्ध सिद्धांत है: "अमल का दारोमदार नीयत पर है" (सहीह बुखारी: 1)।


सारांश (Summary)

अ'तिकाफ की दुआ दुनिया से कटकर ईश्वर से जुड़ने का एक पवित्र संकल्प है। यह दुआ हमें याद दिलाती है कि हमारी हर इबादत अल्लाह के भरोसे और सुन्नत की पैरवी पर टिकी होनी चाहिए। मस्जिद में कदम रखते ही यह शब्द दिल में सुकून और इबादत के लिए एक नई ऊर्जा भर देते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य रमजान के आखिरी दिनों में 'शब-ए-कद्र' की तलाश करना और अपने गुनाहों की माफ़ी मांगना है।

क्या आपने कभी रमज़ान के आखिरी दस दिनों में ऐतिकाफ करने का इरादा किया है?

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