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घर से निकलते वक्त की दुआ

(Dua When Leaving The House)


घर से निकलते वक्त की दुआ हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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घर से निकलते वक्त की दुआ

Updated :29 Apr, 2026 03:24 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन परिवार और घर यात्रा

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بِسْمِ اللّٰہِ تَوَكَّلْتُ عَلَى اللّٰہِ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللّٰہِ

घर से निकलते वक्त की दुआ

घर से निकलते वक्त की दुआ

अर्थ:

अल्लाह अज़वजल के नाम से (घर से निकलता हूँ) मैं ने अल्लाह अज़वजल पर भरोसा किया अल्लाह अज़वजल के बेगैर ना ताकत है (गुनाहो से बचने की) और ना वक्त है (नेकिया करने की)

अंग्रेजी में मतलब:

In the name of Allah Almighty (I comeout of my house) I trust Allah Almighty, there is no capability of saving oneself from sins and neither is there capability to do good deeds but from Allah Almighty.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

घर से बाहर निकलना एक ऐसा सफर है जहाँ हम दुनिया की अनिश्चितताओं और चुनौतियों का सामना करते हैं। यह दुआ—"बिस्मिल्लाह, तवक्कलतू अलल्लाह..."—अल्लाह पर हमारे पूर्ण भरोसे (तवक्कुल) का एक सुंदर इज़हार है। इस दुआ को पढ़ने का अर्थ है कि हम यह स्वीकार करते हैं कि बुराइयों से बचने की ताक़त और नेक काम करने की हिम्मत, सिर्फ अल्लाह की मदद से ही संभव है। यह एक आध्यात्मिक ढाल (Shield) की तरह है, जो हमें हर तरह की बुराइयों और शैतानी असर से सुरक्षित रखती है। इसे पढ़कर हम अपने पूरे दिन और अपने कामों को अल्लाह की हिफाज़त और उसकी पनाह में सौंप देते हैं।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

यह दुआ सुन्नत-ए-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पूरी तरह साबित है और इसकी बड़ी फ़ज़ीलत है। सुनन अबू दाऊद (हदीस संख्या 5095) और सुनन तिरमीज़ी में हदीस मौजूद है कि नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि जो व्यक्ति घर से निकलते वक्त यह दुआ पढ़ता है, तो फ़रिश्ते कहते हैं:

"तुम्हें हिदायत दी गई, तुम्हारी हिफाज़त की गई और तुम्हें हर बुराई से बचा लिया गया।" इतना ही नहीं, शैतान भी ऐसे व्यक्ति से दूर हो जाता है क्योंकि उसे पता होता है कि वह व्यक्ति अब अल्लाह की पनाह में आ चुका है।


सारांश (Summary)

घर से निकलते वक्त यह दुआ पढ़ना अल्लाह पर हमारे पूर्ण भरोसे का प्रतीक है, जो हमें दिन भर की परेशानियों और बुराइयों से बचाए रखता है। यह दुआ हमारे लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है, जिससे हम अल्लाह की विशेष हिफाज़त में आ जाते हैं। इसे पढ़ने से हमारा सफ़र सुरक्षित और बरकत वाला हो जाता है। यह एक छोटी सी सुन्नत हमारे दैनिक जीवन को इबादत में बदल देती है और हमें याद दिलाती है कि हम हर हाल में अल्लाह के मोहताज हैं।

घर से निकलते वक्त सिर्फ दुआ पढ़ना काफी है, या हमें अपनी हिफाज़त के लिए दुनियावी एहतियात (precautions) भी रखनी चाहिए?

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