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नूर (रोशनी) की दुआ — यानी हिदायत, रौशनी और सही रास्ते की प्रार्थना।

(Dua E Noor (Prayer for light))


नूर (रोशनी) की दुआ — यानी हिदायत, रौशनी और सही रास्ते की प्रार्थना। हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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नूर (रोशनी) की दुआ — यानी हिदायत, रौशनी और सही रास्ते की प्रार्थना।

Updated :04 May, 2026 05:46 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन

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اللَّهُمَّ اجْعَلْ لِي فِي قَلْبِي نُورًا وَفِي لِسَانِي نُورًا وَفِي سَمْعِي نُورًا وَفِي بَصَرِي نُورًا وَمِنْ فَوْقِي نُورًا وَمِنْ تَحْتِي نُورًا وَعَنْ يَمِينِي نُورًا وَعَنْ شِمَالِي نُورًا وَمِنْ بَيْنِ يَدَىَّ نُورًا وَمِنْ خَلْفِي نُورًا وَاجْعَلْ فِي نَفْسِي نُورًا وَأَعْظِمْ لِي نُورًا

नूर (रोशनी) की दुआ — यानी हिदायत, रौशनी और सही रास्ते की प्रार्थना।

नूर (रोशनी) की दुआ — यानी हिदायत, रौशनी और सही रास्ते की प्रार्थना।

अर्थ:

ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर पैदा कर, मेरी नज़र में, मेरी सुनने की शक्ति में, मेरी बात (ज़ुबान) में नूर दे। मेरे दाहिने, मेरे बाएं, मेरे ऊपर, मेरे नीचे, मेरे आगे और मेरे पीछे नूर कर दे। ऐ अल्लाह! मेरे लिए इस नूर को मज़बूत बना दे।

अंग्रेजी में मतलब:

O Allah! put noor in my heart, in my sight, in my hearing, in my speech, on my right, on my left, above me, from under me, in front of me, and behind me. O Allah! Make the noor strong for me.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

दुआ-ए-नूर एक अत्यंत प्रभावशाली और गहरी प्रार्थना है जिसमें एक बंदा अल्लाह से अपने वजूद के हर हिस्से को 'नूर' (आध्यात्मिक प्रकाश) से भरने की इल्तजा करता है। यहाँ 'नूर' का अर्थ केवल भौतिक रोशनी नहीं, बल्कि 'हिदायत' (मार्गदर्शन), 'सच्चाई' और 'पवित्रता' है। जब हम अपने दिल, आँखों और कानों के लिए नूर माँगते हैं, तो हम यह चाहते हैं कि हमारा दिल सिर्फ नेक ख्याल रखे, हमारी आँखें केवल जायज़ चीज़ें देखें और हमारे कान सिर्फ सच सुनें। चारों दिशाओं, ऊपर और नीचे से नूर माँगने का मतलब है कि हम खुद को अल्लाह की हिफाज़त और मार्गदर्शन के घेरे में रखना चाहते हैं ताकि शैतानी वसवसे हमें छू न सकें।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

यह दुआ प्रामाणिक हदीस (Hadith) से ली गई है। यह सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम जैसी प्रतिष्ठित किताबों में मौजूद है। हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हु) रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तहज्जुद के वक्त या मस्जिद जाते हुए यह दुआ पढ़ा करते थे। हालाँकि क़ुरान में भी नूर का ज़िक्र है (जैसे सूरह अन-नूर, आयत 35), लेकिन अंगों और दिशाओं के साथ यह विशेष शब्द नबी करीम ﷺ की सुन्नत का हिस्सा हैं।


सारांश (Summary)

(Hindi) दुआ-ए-नूर जीवन के हर मोड़ पर ईश्वरीय मार्गदर्शन प्राप्त करने की दुआ है। यह इंसान के अंतर्मन और बाहरी इंद्रियों को पवित्र बनाती है ताकि वह सही और गलत के बीच फर्क कर सके। यह प्रार्थना हमें चारों तरफ से बुराइयों से बचाती है और हमारे व्यक्तित्व को अल्लाह की हिदायत की रोशनी से रोशन कर देती है।

क्या आपने कभी महसूस किया है कि मुश्किल वक्त में अल्लाह की हिदायत ने आपके रास्ते में 'नूर' का काम किया?

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